Wednesday, 3 February 2021

आंदोलनरत किसान तो 26 जनवरी से पहले ही जीत गए थे लेकिन...

The agitating farmers had won before 26 January but .....


कुछ वरिष्ठ पत्रकार लिख रहे हैं कि राकेश टिकैत के ‘बड़े नेता’ के रूप में उभरने के बाद किसान आंदोलन ‘सफलता’ की ओर बढ़ चला है। मेरा मानना है कि जहां तक तीन कृषि कानूनों की बात है तो किसान आंदोलन 26 जनवरी के पहले ही सफल हो गया था, लेकिन स्वयं किसान नेताओं ने 26 जनवरी का कांड कराकर अपनी सफलता में पलीता लगा लिया। अब राकेश टिकैत की अक्टूबर-नवंबर तक आंदोलन चलने की घोषणा से ऐसा लगता है कि किसानों का कोई भला हो या न हो, लेकिन राकेश टिकैत की यह कोशिश होगी कि यह आंदोलन इतना लंबा चले कि 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों तक इसकी तपिश कायम रहे।


किसानों के आंदोलन के बाद संसद से पास जिन कानूनों पर सरकार तमाम संसोधनों को तैयार हो गई हो, इसके बाद जिन कानूनों के अमल पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी हो और जिन कानूनों को स्वयं सरकार डेढ़-दो साल के लिए स्थगित कर रही हो तो यह एक तरह से इन कानूनों के खत्म होने जैसा ही है। ये तीनों ही बातें भारत के इतिहास में दुर्लभ घटनाओं जैसी हैं और सरकार के लिए काफी अपमानजनक भी, लेकिन संभवतः जो लोग किसानों का नेतृत्व कर रहे हैं, उन्हें कृषि कानूनों की वापसी से ज्यादा इस बात में दिलचस्पी ज्यादा है कि इस मुद्दे के जरिये सरकार पूरी तरह घुटनों पर आ जाए या इस आंदोलन का ज्यादा से ज्यादा राजनैतिक लाभ उठा लिया जाए। यानी आप चाहते हैं कि सामने वाला आपकी बात भी माने और साथ में आपके सामने नाक भी रगड़े। आप जानते हैं कि सामने वाला (सरकार) नाक रगड़ेगा नहीं तो बैठे-बिठाए राजनीतिक फायदे लेने में हर्ज क्या है।


ठीक है कि 26 जनवरी के बाद हालात ने ऐसे मोड़ लिए कि राकेश टिकैत के लिए स्थितियां बेहद अनुकूल हो गईं। लेकिन यदि राकेश टिकैत सरकार के साथ किसी समझौते पर पहुंचते हैं तो क्या यह पंजाब के किसान नेताओं को मंजूर होगा? राकेश टिकैत मुजफ्फरनगर और उसके आसपास की सिसायत में मजबूत हो गए, लेकिन क्या बाकी किसान संगठनों के नेता राकेश टिकैत की बात मानेंगे? क्या वे राकेश टिकैत को अपना नेता मानेंगे? और उन अलगाववादी तत्वों का क्या जो किसानों के भेष में इस आंदोलन में घुसे बैठे हैं? कुल मिलाकर स्थिति बड़ी जटिल है।


मुझे लगता है कि सरकार जितना झुक सकती थी, उतना झुक चुकी है। किसान नेताओं को इस बात को समझना चाहिए। यह सरकार ही नहीं, कोई भी सरकार इससे ज्यादा नरम नहीं हो सकती। यदि होगी तो भी इस बात की कोई गारंटी नहीं कि किसानों का आंदोलनरत हिस्सा सरकार की वाहवाही करेगा। उल्टे जनता का वह बड़ा वर्ग उससे नाराज हो जाएगा जो चाहता है कि 26 जनवरी की हिंसा के दोषियों के खिलाफ अभूतपूर्व कार्रवाई हो।


वरिष्ठ पत्रकार राजीव सचान ठीक लिखते हैं कि “कोई सरकार चाहे कमजोर हो या मजबूत, किसी मसले पर उसके झुकने की एक सीमा होती है। कृषि कानूनों के मामले में मोदी सरकार पर्याप्त झुक चुकी है।” यह बात किसान नेताओं को भी शायद पता है लेकिन स्वयं उनके और इस आंदोलन के पीछे की ताकतों के मंसूबे कुछ और हैं, इसलिए किसान नेता समझकर भी बात को नहीं समझने का नाटक कर रहे हैं। अब शायद उनके मंसूबे यही हैं कि इस मुद्दे के बहाने आंदोलन को इतना खींचा जाए कि 2022 के उत्तर प्रदेश के चुनाव पर इसका अच्छा-खासा असर पड़ जाए। कम से कम राकेश टिकैत और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में राष्ट्रीय लोकदल की सक्रियता देखकर तो यही लगता है। कई पत्रकार साथियों ने अभी से घोषणा कर दी है कि उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव में मुजफ्फरनगर के आसपास की विधानसभा सीटें किसके खाते में जाएंगी। जाहिर है कि ऐसी चर्चा राकेश टिकैत के कानों तक भी पहुंच रही होगी और इससे उनके हौसले बुलंद ही हो रहे होंगे। 


उधर, पंजाब के किसान नेताओं और आंदोलन में घुसपैठ कर चुके खालिस्तानी तत्वों के अपने हित हैं, लेकिन सबके हित (इनमें विपक्षी दल भी शामिल हैं) एक बात पर आकर कॉमन हो जाते हैं कि उनके हित तभी सफल होंगे जब वर्तमान मोदी सरकार कमजोर होगी। इसीलिए दिल्ली के बार्डरों पर चल रही रस्साकशी फिलहाल यू हीं जारी रहने की संभावना लग रही है। हां, नरेंद्र मोदी कुछ 'आउट ऑफ द बॉक्स' सोच रहे हों तो बात अलग है।

- लव कुमार सिंह

 


Wednesday, 23 December 2020

लीजन ऑफ मेरिट : क्या नरेंद्र मोदी यह सम्मान पाने वाले पहले भारतीय हैं?

नरेंद्र मोदी को मिले सम्मानों से संबंधित इन प्रश्नों और उनके उत्तरों को याद रखें, प्रतियोगी परीक्षाओं में बहुत काम आएंगे




1-     दिसंबर 2020 में किस देश ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘लीजन ऑफ मेरिट, डिग्री चीफ कमांडर’ अवार्ड प्रदान किया? ए- रूस, बी- अमेरिका, सी- जापान, डी- फ्रांस (उत्तर- अमेरिका। अमेरिका के अनुसार नरेंद्र मोदी के कुशल नेतृत्व में भारत के वैश्विक फलक पर एक शक्ति के रूप में उभरने और वैश्विक चुनौतियों के मद्देनजर भारत-अमेरिकी रणनीतिक गठजोड़ को मजबूत बनाने के लिए यह पुरस्कार भारत के प्रधानमंत्री को दिया गया है।)

2-     ‘लीजन ऑफ मेरिट’ अमेरिका का किस क्षेत्र का सबसे बड़ा सम्मान है? ए- राजनीति, बी- आर्थिक, सी- सामाजिक, डी- सैन्य (उत्तर- सैन्य क्षेत्र)

3-     ‘लीजन ऑफ मेरिट’ सम्मान नरेंद्र मोदी से पहले किस भारतीय प्रधानमंत्री को मिला है? ए- इंदिरा गांधी, बी- जवाहर लाल नेहरू, सी- अटल बिहारी वाजपेयी, डी- किसी को नहीं (उत्तर- किसी को नहीं)

4-     अमेरिका का ‘लीजन ऑफ मेरिट’ सम्मान इनमें से किसे नहीं मिला है? ए- भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, बी- जापानी प्रधानमंत्री शिंजो आबे, डी- आस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरीसन, डी- फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों (उत्तर- फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों)

5-     ए- यहां दिए तथ्यों में कोई भी सही नहीं है, बी- तथ्यि 2 सही है, सी- तथ्य 1, 3 और 4 सही है, डी- चारों तथ्य सही हैं। तथ्य 1- ‘लीजन ऑफ मेरिट’ सम्मान नरेंद्र मोदी से पहले दो भारतीयों को मिल चुका है। तथ्य 2- ‘लीजन ऑफ मेरिट’ सम्मान नरेंद्र मोदी से पहले एक भारतीय को मिल चुका है। तथ्य 3- 1950 में यह सम्मान फील्ड मार्शल के. करियप्पा को मिला था। तथ्य 4- 1955 में यह सम्मान जनरल सत्यवंत श्रीनागेश को मिला था। (उत्तर- तथ्य 1, 3 और 4 सही हैं)

6-     ‘लीजन ऑफ मेरिट’ सम्मान के बारे में क्या सही नहीं है? ए- इस सम्मान में अलग-अलग पद हैं जैसे ऑफिसर, कमांडर, चीफ कमांडर आदि। बी- यह पहला ऐसा सम्मान है जो अमेरिका विदेशी नागरिकों को भी देता है। सी- इसमें पांच दिशाओं का सफेद क्रास होता है, जिनके किनारे लाल होते हैं और ये हरे रंग के चक्र पर होते हैं जिनके केंद्र में नीले रंग के अंदर 13 सफेद सितारे होते हैं। डी- तीनों तथ्य सही हैं। (उत्तर- तीनों तथ्य सही हैं।)

7-     भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 2019 में किस देश ने अपना सर्वोच्च सम्मान ‘ऑर्डर ऑफ सेंट एंड्रयू द एपोस्टल’ सम्मान प्रदान किया? ए- सऊदी अरब, बी- फ्रांस, सी- संयुक्त अरब अमीरात, डी- रूस (उत्तर- रूस)

8-     भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 2019 में किस देश ने अपना सर्वोच्च सम्मान ‘ऑर्डर ऑफ जायद’ दिया था? ए- संयुक्त अरब अमीरात, बी- सऊदी अरब, सी- जार्डन, डी- कुवैत (उत्तर- संयुक्त अरब अमीरात)

9-     किस देश ने 2016 में अपना सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘स्टेट ऑर्डर ऑफ गाजी अमानुल्लाह खान’ भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दिया? ए- सऊदी अरब, बी- अफगानिस्तान, सी- फिलिस्तीन, डी- कुवैत (उत्तर- अफगानिस्तान)

10- किस देश ने 2016 में अपना सर्वोच्च सम्मान ‘ऑर्डर ऑफ अब्दुल अजीज अल सऊद’ भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दिया? ए- सऊदी अरब, बी- संयुक्त अरब अमीरात, सी- कुवैत, डी- बहरीन (उत्तर- सऊदी अरब)

11- फिलिस्तीन ने अपना सर्वोच्च सम्मान ‘ग्रैंड कॉलर ऑफ स्टेट ऑफ फलस्तीन अवार्ड’ किस वर्ष भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को प्रदान किया? ए- 2016, बी- 2017, सी-2018, डी- 2019 (उत्तर- 2018)

12- मालदीव ने अपना सर्वोच्च सम्मान ‘ऑर्डर ऑफ डिस्टिग्विंश्ड रूल ऑफ निशान आईज्जुद्दीन’ किस वर्ष भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दिया? ए- 2016, बी- 2017, सी-2018, डी- 2019 (उत्तर- 2019)


- लव कुमार सिंह

Tuesday, 22 December 2020

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय का शताब्दी समारोह : इन प्रश्नों को याद रखें, कम्पीटीशन में काम आएंगे

#AMU, #ModiInAMU, #CurrentAffairs, #AligarhMuslimUniversity




1-  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार 22 दिसंबर 2020 को अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU) के शताब्दी समारोह को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए संबोधित किया। उनसे पहले किस प्रधानमंत्री ने ऐसा किया था? इंदिरा गांधी, अटल बिहारी वाजपेयी, लाल बहादुर शास्त्री, राजीव गांधी? (उत्तर- लाल बहादुर शास्त्री ने 1964 में)

2-  एएमयू की स्थापना किसने की थी? मौलाना अबुल कलाम आजाद, सर सैयद अहमद खान, डॉ. जाकिर हुसैन, खान अब्दुल गफ्फार खां? (उत्तर- सर सैयद अहमद खान)

3-  एएमयू की स्थापना कब हुई थी? 1921, 1925, 1922, 1920  (उत्तर- 1920)

4-  एएमयू को केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा कब मिला? 1921, 1925, 1920, 1930? (उत्तर- 1921)

5-  एएमयू के अस्तित्व में आने से पहले इसका क्या नाम था? मुस्लिम कॉलेज, मुस्लिम एंग्लो ओरिएंटल कॉलेज, फैज-ए-आम कॉलेज, जौहर विश्वविद्यालय? (उत्तर- मुस्लिम एंग्लो ओरिएंटल कॉलेज)

6-  मुस्लिम एंग्लो ओरिएंटल कॉलेज की शुरुआत कब हुई? 1877, 1890, 1900, 1895? (उत्तर- 1877)

7-  अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय सबसे पहले एक स्कूल (मदरसा) के रूप में कब शुरू हुआ था? 1875, 1885, 1880, 1890 (उत्तर- 1875)

8-  वे दो भारत रत्न कौन हैं जिनका संबंध एएमयू से रहा है? डॉ. जाकिर हुसैन व खान अब्दुल गफ्फार खान, अबुल कलाम व एपीजी अब्दुल कलाम, अरुणा आसफ अली व उस्ताद बिस्मिल्लाह खां, मरुदुर गोपालन व गुलजारी लाल नंदा (उत्तर- डॉ. जाकिर हुसैन और खान अब्दुल गफ्फार खान)

9-  इनमें क्या सही नहीं है? एएमयू के संग्रहालय का नाम मूसा डाकरी है।, एएमयू के संग्रहालय में 27 देव प्रतिमाओं का संग्रह भी है।, इस संग्रहालय में डायनासोर के अवशेष भी है।, इस संग्रहालय में रामायण काल की भी कई चीजें हैं। (उत्तर- इस संग्रहालय में रामायण काल की भी कई चीजें हैं।)

10- एएमयू का आदर्श वाक्य क्या है? (उत्तर- अल्लामल इन्साना मा लम य आलम अर्थात् आदमी को वो सिखाओ जो उसे नहीं आता)

11- इनमें से कौन अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से जुड़ा हुआ व्यक्तित्व नहीं है? दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री साहिब सिंह वर्मा, हाकी के जादूगर ध्यानचंद, पूर्व क्रिकेटर लाला अमरनाथ, फिल्म अभिनेता कादर खान? (उत्तर- फिल्म अभिनेता कादर खान)

12- पाकिस्तान के कौन से प्रधानमंत्री का संबंध एएमयू से रहा है? लियाकत अली खान, मोहम्मद अयूब खान, जुल्फीकार अली भुट्टो, चौधरी मोहम्मद अली? (उत्तर- पहले प्रधानमंत्री लियाकत अली खान)

13- भारत के किस उपराष्ट्रपति का संबंध एएमयू से रहा है? मोहम्मद हिदायतुल्ला, मोहम्मद हामिद अंसारी, शंकरदयाल शर्मा, कृष्णकांत? (उत्तर- मोहम्म्द हामिद अंसारी)

14- सर सैयद अहमद खान ने 1857 के स्वतंत्रता संग्राम पर कौन सी पुस्तक लिखी? (उत्तर- असबाब-ए-बगावत-ए-हिंद)

15- शिक्षा के क्षेत्र में काम करने से पहले सैयद अहमद खान ने कौन-कौन से काम किए? (उत्तर- ईस्ट इंडिया कंपनी में लिपिक और विभिन्न स्थानों पर न्यायिक विभागों में उपन्याधीश के रूप में काम किया)

16- एएमयू में 22 दिसंबर को पीएम के भाषण से हमें ये तथ्य भी पता चले-

  •   वर्ष 2014 में हमारे देश में 16 IITs थीं। आज 23 IITs हैं।
  •   वर्ष 2014 में हमारे देश में 9 IIITs थीं। आज 25 IIITs हैं।
  •   वर्ष 2014 में हमारे यहाँ 13 IIMs थे। आज 20 IIMs हैं।
  •   6 साल पहले तक देश में सिर्फ 7 AIIMS थे। आज देश में 22 AIIMS हैं।
  •   पहले मुस्लिम लड़कियों का स्कूल ड्रॉपआउट रेट 70% से ज्यादा था, लेकिन अब ये अब 30% के आसपास रह गया है।

- लव कुमार सिंह

 

Wednesday, 2 December 2020

ऐसा वैवाहिक विज्ञापन आपने इससे पहले नहीं देखा होगा

देखकर, पढ़कर बताएं कि क्या इन साहब को ऐसी लड़की मिलेगी?

अखबारों में हर हफ्ते हजारों वैवाहिक विज्ञापन छपते हैं, जिनके जरिये लोग अपने या अपने प्रियजनों के लिए वधू या वर की तलाश करते हैं। इन विज्ञापनों में हमें कई बार अनेक दिलचस्प विवरण देखने को मिलते हैं। ऐसा ही एक विज्ञापन पिछले दिनों देखने को मिला। वधू की तलाश करने वाला यह विज्ञापन अपने बड़े आकार के कारण तो अपनी तरफ लोगों का ध्यान खींचता ही है, इसके अंदर दिया गया विवरण भी बड़ा रोचक और अजीबोगरीब है। सबसे पहले आप इस विज्ञापन को देखिए और पढ़िए-



बॉक्स में छापा गया यह विज्ञापन किन्हीं डॉ अभिनव कुमार की तरफ से दिया गया है जो ब्राह्मण जाति से आते हैं।

विज्ञापन के अनुसार कुमार साहब बीडीएस यानी बैचलर ऑफ डेंटल साइंस हैं। इनकी लंबाई पांच फीट आठ इंच है। वर्तमान में कहीं काम नहीं कर रहे हैं। जन्म 2 अप्रैल 1989 को हुआ है यानी करीब 31 वर्ष के हैं। जन्म का समय सुबह 9.45 का लिखा है। जन्म स्थान भागलपुर, बिहार है। ब्राह्मण जाति में इनका गोत्र भारद्वाज है।

विज्ञापन के अनुसार कुमार साहब एक बेहद गोरी, सुंदर, बेहद निष्ठावान, बेहद भरोसेमंद, प्यारी, देखभाल करने वाली, बहादुर, शक्तिशाली और धनी वधू चाहते हैं।

इसी के साथ ये चाहते हैं कि लड़की अत्यधिक देशभक्त हो, जिसमें भारत की सैन्य और खेल क्षमताओं को बढ़ाने की प्रबल (गहरी) इच्छा हो। लड़की अतिवादी लेकिन दयालु भी होनी चाहिए। उसे बच्चे के पालन-पोषण में विशेषज्ञ होना चाहिए और वह शानदार कुक भी होनी चाहिए। वह ब्राह्मण हो और कामकाजी भी होनी चाहिए। लड़की को झारखंड या बिहार से होना चाहिए। संपूर्ण कुंडली मिलन और 36 गुणों का मिलन भी अनिवार्य है।

है ना दिलचस्प, अजीबोगरीब और ध्यानखींचू विज्ञापन? क्या इन साहब को ऐसी लड़की मिलेगी, जो इन सभी शर्तों पर खरी उतरेगी? आपकी इस विज्ञापन के बारे में क्या राय है? 

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Monday, 26 October 2020

आईपीएल : करीब 100 खिलाड़ी बाहर बैठे हैं, जिनमें से कई अपने देश के स्टार क्रिकेटर हैं

इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के मध्य पड़ाव पर 13 अक्टूबर को ऐसे करीब 100 खिलाड़ियों की सूची जारी हुई है जिनमें से अधिकांश यूएई में खेले जा रहे आईपीएल के दौरान एक भी मैच नहीं खेल पाए हैं। ये सूची इसलिए जारी हुई है कि यदि कोई टीम इनमें से किसी खिलाड़ी को खरीदना चाहे तो वह मिड सीजन ट्रांसफर विंडो के जरिये उसे खरीद सकती है।

खास बात यह है कि इनमें ऐसे दिग्गज खिलाड़ी भी शामिल हैं जो अपनी राष्ट्रीय टीम का अनिवार्य रूप से हिस्सा होते हैं, लेकिन आईपीएल में उनकी कोई पूछ ही नहीं है और वे बाहर बैठे मक्खियां मारने पर मजबूर हैं। इन्हीं में कई खिलाड़ी ऐसे हैं जो पहले अपनी आईपीएल टीम के लिए शानदार प्रदर्शन कर चुके हैं, लेकिन अब उन्हें टीम में स्थान नहीं मिल रहा है।

इसका एक कारण तो यह है कि हर टीम में काफी अतिरिक्त खिलाड़ी खरीदे जाते हैं तो ऐसे में जाहिर है कि यदि किसी टीम में 20 खिलाड़ी होंगे तो खेलने का मौका तो 11 को ही मिलेगा।

दूसरा कारण यह हो सकता है कि खिलाड़ी का प्रदर्शन ही अच्छा न हो। जैसे कि रॉयल चैलेंजर बंगलुरू में डेल स्टेन और उमेश यादव शुरुआत में खेले लेकिन उनका प्रदर्शन बहुत कमजोर रहा जिससे उन्हें बाहर का रास्ता देखना पड़ा। उनकी जगह टीम में आए क्रिस मोरिस और उड़ाना जिस प्रकार की गेंदबाजी कर रहे हैं, उससे नहीं लगता कि अब डेल स्टेन या उमेश यादव को टीम में जगह मिलेगी।

तीसरा कारण किसी खिलाड़ी का टीम की योजना में फिट नहीं होना बताया जाता है, जो कि सबसे लचर कारण नजर आता है। चेन्नई सुपर किंग्स अपने स्टार स्पिनर इमरान ताहिर को इसीलिए नहीं खिला रही है कि वे उसकी योजना में फिट नहीं बैठ रहे हैं। कहा जा रहा है कि यदि आईपीएल भारत में होता तो इमरान ताहिर जरूर सीएसके की टीम में होते। यूएई में ऐसी क्या बात है? कहा जा रहा है कि वहां पर तेज गेंदबाज सफल हो रहे हैं। लेकिन यह तथ्य सही नहीं है।

आरसीबी में यजुवेंद्र चहल और सनराइजर्स हैदराबाद में राशिद खान मैच विजेता गेंदबाज बने हुए हैं। आरसीबी में वाशिंगटन सुंदर ने अपनी स्पिन गेंदबाजी से टीम में जगह पक्की कर ली है। दिल्ली कैपिटल में चोटिल होने से पहले मिश्रा टीम का हिस्सा थे। अश्विन वहां हैं ही और साथ में अक्षर पटेल जैसे साधारण स्पिन गेंदबाज भी सफल हो रहे हैं। मुंबई इंडियन में राहुल चाहर ने अपनी स्पिन गेंदबाजी के कारण ही टीम में जगह पक्की कर रखी है, वरना वहां एक से बढ़कर एक खिलाड़ी भरे हुए हैं।

सीएसके में यदि पीयूष चावला को कई खिलाकर बाहर किया जा सकता है और फिर से अंतिम 11 में लिया जा सकता है तो ऐसे में इमरान ताहिर को क्यों नहीं खिलाया जा सकता है? ऐसी योजना समझ से परे हैं कि आपकी टीम का प्रदर्शन भी कमजोर हो लेकिन आपकी योजना में कोई कमी नहीं हो।

अगर बाहर बैठे 100 खिलाड़ियों की सूची को देखें तो मुंबई इंडियन में क्रिस लिन जैसे हिटर का खेलना बनता है। चेन्नई सुपर किंग्स में इमरान ताहिर और सेंटनर का खेलना बनता है। सेंटनर न्यूजीलैंड के शीर्ष गेंदबाज हैं और भारतीय खिलाड़ी और प्रशंसक जानते हैं कि सेंटनर के कारण कई बार भारत की टीम अंतराष्ट्रीय स्तर पर पराजित हुई है।

चेन्नई में ही जोश हेजलवुड का भी खेलना बनता है, जो आस्ट्रेलिया के शीर्ष तेज गेंदबाज हैं। सनराइजर्स हैदराबाद में बासिल थम्पी का मौका बनता है जो कि पहले बढ़िया प्रदर्शन कर चुके हैं। दिल्ली कैपिटल्स में कीमो पॉल और लामिछाने, किंग्स इलेवन पंजाब में क्रिस गेल का खेलना बनता है। किंग्स इलेवन वैसे भी सबसे नीचे चल रही है इसलिए गेल को मौका दिया जाना जरूरी है। केकेआर में लॉकी फर्ग्यूसन पूर्व में बढ़िया प्रदर्शन कर चुके हैं लेकिन फिलहाल अंतिम 11 से दूर हैं। राजस्थान रॉयल्स में मयंक मार्कंडेय को मौका दिया जाना चाहिए। आरसीबी में पार्थिव पटेल का भी उपयोग होना चाहिए।

करीब सौ खिलाड़ी बाहर बैठे हैं तो क्या ये खिलाड़ी उपेक्षित महसूस नहीं करते होंगे? शायद 'हां' क्योंकि नए खिलाड़ियों को छोड़ दें तो कई दिग्गज खिलाड़ियों का उनके देश की टीम में बहुत नाम और सम्मान है। शायद 'ना' भी क्योंकि इन खिलाड़ियों को बिना खेले खूब सारा पैसा तो मिल ही रहा है, फिर किस बात की चिंता है।

उपेक्षा से ख्याल आता है गौतम गंभीर का, जिनका आज यानी 14 अक्टूबर को जन्मदिन भी है। केकेआर में गौतम गंभीर का क्या जलवा था। वहां उन्होंने अपनी टीम को खिताब भी दिलवाया था। फिर पता नहीं क्यों वे दिल्ली की टीम में आ गए और दिल्ली की कप्तानी की। फिर एक दिन हमने देखा कि दिल्ली का कप्तान ही बदल गया और गौतम गंभीर को अंतिम 11 में भी जगह नहीं मिली। कुछ दिन गंभीर ने बाहर बैठकर मैच देखा और फिर वे क्रिकेट से ही बाहर हो गए।

ये सब देखकर लगता है कि आईपीएल में पैसा भी बहुत है और यहां खिलाड़ियों को चमकने का मौका भी मिलता है, लेकिन यहां पर पुराने खिलाड़ियों की साख और सम्मान भी दांव पर लगा होता है। स्टार खिलाड़ियों को बाहर निराश भाव से बैठा हुआ देखकर बड़ी तकलीफ होती है। इससे अच्छा तो व्यवस्था यह होनी चाहिए कि हर टीम में केवल 13-14 खिलाड़ी हों और यदि टीम में कोई खिलाड़ी घायल होता है और उसका रिप्लेसमेंट नहीं मिलता है तो टीम को बाहर से कोई भी खिलाड़ी खरीदने की मंजूरी मिलनी चाहिए।

- लव कुमार सिंह

वे बदलाव जो टी-ट्वेंटी/आईपीएल के रोमांच को शिखर पर ले जा सकते हैं?

 भारत और शेष दुनिया के क्रिकेट के प्रशंसक इस समय इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) का आनंद ले रहे हैं। लेकिन क्या टी-ट्वेंटी क्रिकेट या आईपीएल के वर्तमान नियम खिलाड़ियों को इस खेल को खेलने और दर्शकों को इस खेल को देखने का पूरा आनंद दे रहे हैं? अगर बिल्कुल हाल-फिलहाल की कुछ प्रतिक्रियाओं पर नजर डालें तो उत्तर ‘ना’ में मिलता है।

ये प्रतिक्रियाएं कुछ इस प्रकार हैं-

  • किंग्स इलेविन पंजाब के कप्तान के.एल. राहुल ने कहा है कि 100 मीटर से बड़ा छक्का लगाने पर खिलाड़ी को अतिरिक्त रन मिलने चाहिए।
  • विराट कोहली कह रहे हैं कि वाइड और नो बॉल के मामले में भी कप्तानों को रिव्यू लेने का विकल्प मिले।
  • स्टार स्पोर्ट्स के कमेंट्री पैनल पर एक दिन चर्चा हो रही थी कि यदि कोई गेंदबाज 2 विकेट ले ले तो उस मैच में कप्तान को यह छूट मिलनी चाहिए कि वह उस गेंदबाज से कुछ अतिरिक्त ओवर फिंकवा सके।
  • हर्षा भोगले कह रहे हैं कि गेंदबाजों को इस खेल में वापस लेकर आइए। तब ये खेल और भी समृद्ध हो जाएगा। उनका कहना है कि इस खेल से गेंदबाजों को कभी भी बाहर मत ले जाइए।

इसका अर्थ है कि खेल को रोमांच के शिखर पर ले जाने के लिए वर्तमान नियमों में अभी भी कहीं न कहीं कुछ कमी है। इस खेल के बल्लेबाजों के पक्ष में झुके होने के आरोप तो पहले से ही लगते रहे हैं, लेकिन और भी कई बातें ऐसी हैं जिन पर विचार करके इस खेल को और भी रोचक और मजेदार बनाया जा सकता है। तो चलिए यहां हाजिर हैं कुछ सुझाव जो यह बताते हैं कि टी-ट्वेंटी या आईपीएल में ऐसे क्या बदलाव हो सकते हैं जिससे इस खेल में रोमांच अपने चरम पर पहुंच जाए।

 

बदलाव 1

 

नियमों में एक बदलाव यह होना चाहिए फील्डिंग कर रही टीम का हर खिलाड़ी (विकेटकीपर को छोड़कर) 1 ओवर जरूर फेंकेगा। लेकिन कप्तान को यह छूट भी मिलेगी कि वह बाकी बचे 10 ओवर अपने किन्हीं भी पसंदीदा गेंदबाजों से पूरा करा सकेगा।

इस नियम से खेल का रोमांच बहुत बढ़ जाएगा क्योंकि यह नियम खेल की संपूर्णता को दर्शाएगा और दर्शकों को खेल के तीनों क्षेत्रों (बल्लेबाजी, गेंदबाजी और फील्डिंग) में खिलाड़ियों के कौशल को देखने का मौका मिलेगा। दर्शकों को विराट कोहली, रोहित शर्मा, एबी डिविलियर्स, डेविड वार्नर जैसे खिलाड़ियों को गेंदबाजी करते देखकर बहुत मजा आएगा।

इस नियम से बल्लेबाजी कर रही टीम को यह फायदा होगा कि वह उन 5 ओवरों में काफी रन बनाने की कोशिश करेगी जिन्हें अनियमित गेंदबाज फेंकेंगे। दूसरी तरफ गेंदबाजी टीम को यह फायदा होगा कि वह बाकी के 10 ओवर उन गेंदबाजों से करवा सकते हैं जो उनके सर्वश्रेष्ठ गेंदबाज हैं। हालांकि नियम के लागू होने के कुछ समय बाद कथित अनियमित गेंदबाज भी पहले जैसे नहीं रह जाएंगे क्योंकि फिर वे भी गेंदबाजी में कुछ अच्छा करने के लिए पर्याप्त अभ्यास करेंगे।

 

बदलाव 2

एक नियम यह बने कि बाउंड्री के पार एक तय दूरी तक गेंद का टप्पा लगने पर 6 रन होंगे, जो अभी भी मिलते हैं, लेकिन उस दूरी के बाद जैसे-जैसे छक्के का टप्पा दूर होता जाएगा, रन बढ़ते (7, 8,9 और 10) जाएंगे। उदाहरण के लिए मान लिया कि 80 मीटर की बाउंड्री है। अब गेंद का टप्पा 80 से 85 मीटर के बीच लगा तो 6 रन, लेकिन 85 से 90 मीटर के बीच टप्पा होने पर 7 रन, 90 से 95 मीटर पर 8 रन, 95 से 100 मीटर पर 9 रन और 100 मीटर के पार टप्पा जाने पर 10 रन दिए जाएंगे। बाउड्री 80 मीटर से छोटी है तो उसी के अनुसार नियम बन सकता है।

 

यह नियम खेल के रोमांच को उच्च स्तर पर ले जाने में सफल होगा। ऐसा होने से अच्छी टाइमिंग और ताकत का प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को इसका पुरस्कार भी मिलेगा। यह नियम वन-डे और टेस्ट क्रिकेट में भी होना चाहिए।

बदलाव 3

एक नियम यह होना चाहिए कि बल्लेबाजी करने वाली टीम को प्रत्येक 5 ओवर के अंदर 1 चौका या छक्का लगाना होगा। यदि टीम ऐसा करने में विफल रहती है तो उसके स्कोर से 5 रन घटा दिए जाएंगे। लेकिन यदि टीम 5 ओवर में 5 चौके लगा देती है तो इन पांच चौकों के लिए मिले 20 रन के अलावा टीम को 5 रन और भी मिलेंगे।

इस नियम से खेल में काफी तेजी आएगी और रोमांच भी बढ़ जाएगा। यह नियम वन-डे और टेस्ट क्रिकेट में भी होना चाहिए।

बदलाव 4

एक नियम यह हो कि यदि बल्ले से गेंद का संपर्क होता है और ऐसे 5 संपर्कों के बाद बल्लेबाज एक रन भी नहीं बना पाता है तो उस बल्लेबाज के स्कोर में से हर बार ऐसे 5 निष्क्रिय संपर्कों के बाद 1 रन कम कर दिया जाएगा। इसी के साथ-साथ टीम के योग में से भी 1 रन घटा दिया जाएगा।

हो सकता है कि तब तक बल्लेबाज ने कोई रन ही न बनाया हो। ऐसी स्थिति में केवल टीम के स्कोर से 1 रन कम होगा और बल्लेबाज के स्कोर से रन तब घटेगा जब वह कोई रन बना लेगा। यदि बल्लेबाज गेंद-बल्ले के 5 बार संपर्क के बावजूद शून्य पर आउट होता है तो केवल टीम के स्कोर से 1 रन कम होगा।

 

यह नियम वैसे तो टेस्ट और वन-डे क्रिकेट के लिए बहुत उपयोगी होगा, लेकिन यदि टी-ट्वेंटी में भी लागू हो तो इससे खेल का रोमांच बढ़ेगा।

बदलाव 5

इसी के साथ यह नियम हो कि यदि कोई बल्लेबाज ऊपर बदलाव 4 में बताए गए गेंद-बल्ले के ऐसे निष्क्रिय संपर्कों के जरिये अपने और टीम के 10 रन कम करता है तो वह आउट माना जाएगा। इस प्रकार से आउट हुआ खिलाड़ी तभी दोबारा बल्लेबाजी कर सकेगा, जबकि शेष बचे बल्लेबाज किसी एक ओवर में कम से कम 20 रन बनाएंगे।

निश्चित ही कोई बल्लेबाज इस प्रकार आउट नहीं होना चाहेगा। ऐसे में अब के मुकाबले तेज खेल देखने को मिलेगा। गेंदबाजी करने वाली टीम को बल्लेबाज को आउट करने का एक नया तरीका मिलेगा। इस प्रकार आउट हुए बल्लेबाज को पुनः जीवित करने के लिए बाकी खिलाड़ी एक ओवर में 20 रन बनाने का प्रयास करेंगे तो रोमांच चरम पर होगा।

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अंत में विराट कोहली की उस मांग में दम है कि वाइड या कमर से ऊपर टप्पे वाली नो बॉल के मामले में भी रिव्यू लेने की अनुमति दी जानी चाहिए। इन दोनों मामलों में मैदानी अंपायरों से काफी गड़बड़ियां हो रही हैं।

एक और विवादास्पद चीज ‘अंपायर कॉल’ है। एलबीडब्लू के मामले में यदि रिव्यू लेने पर गेंद बिना बल्ले को छुए विकेट पर लगती दिख रही हो तो बल्लेबाज को आउट दिया जाना चाहिए, फिर चाहे गेंद का टप्पा कहीं पर भी पड़ा हो और ‘अंपायर कॉल’ कुछ भी हो।

- लव कुमार सिंह

 

 

आईपीएल के मौसम में टीवी हुआ खराब तो एक नई दुनिया से रूबरू हुआ जनाब

पिछले दिनों अपना टेलीविजन सेट खराब हो गया। आईपीएल में चौके-छक्कों की बरसात वाले मौसम में जैसे अकाल सा पड़ गया। दिन में टीवी सेट को बाजार में ठीक कराने ले गया तो मिस्त्री ने कहा कि यह सेट आज नहीं बल्कि कल ठीक होगा। उसकी बात सुनकर दिल बैठ गया। अब शाम को क्रिकेट मैच कैसे देखा जाएगा? शाम होते-होते मन और भी उदास हो गया। बेटा बोला, ‘पापा हॉट स्टार का सब्सक्रिप्शन ले लो।’ लेकिन अपनी जेब इन दिनों कुछ तंग चल रही थी। फिर एक दिन बाद तो टीवी आ ही जाना था, लिहाजा हॉट स्टार का प्लान रद्द हो गया। मैं उदास बैठा ही था कि बेटे ने मोबाइल फोन में कोई यू-ट्यूब चैनल चला दिया जिस पर रेडियो की तरह क्रिकेट की कमेंट्री आ रही थी। सुनकर मेरा दिल उछल पड़ा। बस फिर क्या था, अपनी पूरी शाम और रात यू-ट्यूब चैनल पर क्रिकेट की कमेंट्री सुनते ही अच्छी बीत गई।

मैंने देखा कि यू-ट्यूब पर एक नहीं बल्कि अनेक बंदे चैनल खोलकर और टीवी के सामने बैठकर आईपीएल के मैचों की रनिंग कमेंट्री कर रहे थे। किसी चैनल पर स्क्रीन पर केवल स्कोर बोर्ड था और बैकग्राउंड से कमेंट्री की आवाज आ रही थी। किसी चैनल पर स्कोर बोर्ड और कमेंट्री करने वालों का बोलते हुए चेहरा भी था। किसी चैनल पर एक ही बंदा धाराप्रवाह लगा हुआ था तो किसी चैनल पर दो तो किसी पर तीन-तीन लोग मिलकर कमेंट्री के साथ हंसी-मजाक भी कर रहे थे। किसी चैनल पर कमेंट्री के साथ मैदान की गतिविधियों को एनिमेशन के जरिये दिखाया जा रहा था।

हालांकि सभी बंदों का कमेंट्री का स्तर बहुत अच्छा नहीं था। कोई बंदा लगातार बोले ही जा रहा था और पॉज ही नहीं ले रहा था, जिससे कानों को राहत नहीं मिल रही थी। कोई कमेंटेटर यह कम बता रहा था कि मैदान पर क्या हो रहा है बल्कि उसकी रुचि इस बात में ज्यादा थी कि सुनने वाले उसके वीडियो को ज्यादा से ज्यादा लाइक करें। कहीं एक से ज्यादा कमेंटेटर थे तो वे आपस में ही हंसी-मजाक में लगे हुए थे। इस सबके बावजूद मैच की ताजा जानकारी सुनने को मिल रही थी और यह अपने लिए काफी था।

मैं सोच रहा था कि टीवी पर लाइव प्रसारण के जमाने में इन्हें कौन सुनता होगा, लेकिन आश्चर्य की बात थी कि हजारों लोग उन्हें सुन रहे थे और उनमें मैं भी शामिल था। सभी कमेंट्री चैनलों पर जबरदस्त लाइक और प्रतिक्रियाएं भी आ रही थीं। कमेंट्री करने वाले बीच-बीच में अपने सुनने वालों की प्रतिक्रियाएं भी ले रहे थे। एक चैनल कह रहा था कि आज के मैच में उसका 10 हजार लाइक का लक्ष्य है तो दूसरा चैनल सुनने वालों से आग्रह कर रहा था कि उसके लाइक को 3 हजार के पार पहुंचा दो।

इन कमेंट्री चैनल पर आने वाली प्रतिक्रियाएं सुनीं और फिर विचार किया तो पाया कि दफ्तरों में रात में काम करने वाले, बसों-ट्रेनों में चलने वाले, सुरक्षा बलों में दूरदराज के क्षेत्रों में तैनात जवान समेत हजारों-लाखों लोग इस रनिंग कमेंट्रीज को विभिन्न चैनलों पर सुन रहे थे। अर्थात टीवी पर लाइव मैच के जमाने में भी रेडियो जैसी कमेंट्री न केवल जारी है बल्कि उसके ग्राहक भी काफी संख्या में हैं। यह देखकर अच्छा लगा कि इससे कई लोग यू-ट्यूब चैनल पर अपनी रोजी-रोटी भी कमा रहे हैं।

अगले दिन टीवी ठीक करने की दुकान पर गया तो उसने फिर से एक दिन का समय मांग लिया। इस प्रकार उस दिन की शाम और रात भी मैच नहीं देख पाया और कमेंट्री सुनकर ही काम चलाना पड़ा। खैर, तीसरे दिन टीवी ठीक होकर आ गया और हम फिर से शाम होते ही उसके सामने जमने लगे, लेकिन दो दिन घर में टीवी न होने से जो अनुभव हुआ वह भी कमाल का था। इस दौरान पता चला कि रनिंग कमेंट्री जिंदा है। टीवी का सजीव प्रसारण उसे खा नहीं पाया है। किसी ने सही कहा है कि ये दुनिया बहुत बड़ी है। सबको सबका हिस्सा देती है।

आगे से यदि आपका टीवी भी खराब हो जाए तो फिकर नॉट। कुछ दिन किसी चैनल पर कमेंट्री सुनिए। जायका बदल जाएगा। और अगर आप क्रिकेट के थोड़े जानकार भी हैं और अपनी बात कहने की क्षमता रखते हैं तो तो शर्तियां कहता हूं कि आपका भी मन कर जाएगा कि क्यों न एक यू-ट्यूब चैनल खोलकर क्रिकेट की कमेंट्री शुरू कर दी जाए। मेरा मन भी कुछ ऐसा ही सोच रहा है। मैच का मैच देखो और कमेंट्री की कमेंट्री करो।

- लव कुमार सिंह