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Thursday, 23 September 2021

आईपीएल में किस गेंदबाज ने सबसे तेज 151.03 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से गेंद फेंकी?

Which bowler bowled the fastest 151.03 kmph in IPL?

नवीनतम सामान्य ज्ञान (खेल)


उमरान मलिक

आईपीएल में किस गेंदबाज ने सनराइजर्स हैदराबाद की ओर से कोलकाता नाइटराइडर्स के खिलाफ सबसे तेज 151.03 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से गेंद फेंकी? Which bowler bowled the fastest 151.03 kmph for Sunrisers Hyderabad against Kolkata Knight Riders in IPL?

आईपीएल के वर्तमान सत्र में सबसे तेज गेंद उमरान मलिक ने फेंकी। 21 वर्ष के उमरान मलिक जम्मू-कश्मीर के तेज गेंदबाज हैं। उनके द्वारा कोलकाता नाइटराइडर्स के खिलाफ फेंकी गई 151.03 किमी प्रति घंटे वाले वाली गेंद आईपीएल के  इस सत्र में किसी भारतीय गेंदबाज द्वारा फेंकी गई सबसे तेज गेंद थी। आईपीएल के पहले मैच में उनकी 24 में से 11 गेंदों की रफ्तार 145 किमी. से अधिक थी। उमरान को टी. नटराजन के कोरोना की चपेट में आने के कारण टीम में चुना गया था। उनके पिता फल सब्जी की दुकान करते हैं। उमरान से पहले जवागल श्रीनाथ, वरुण एरोन और जसप्रीत बुमराह ही ऐसे भारतीय गेंदबाज हैं जो 150 किमी. की गति से गेंद फेंक सके हैं। (यहां बताते चलें कि बाद के मैच में मलिक ने 153 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से भी गेंद फेंकी।)

किस देश की टीम पहली बार टी-20 विश्व कप खेली और पहली बार में ही वह सुपर-12 में भी पहुंच गई? Which country's team played the T20 World Cup for the first time and reached the Super-12 for the first time?

यह नामीबिया की टीम है जिसने पहली बार विश्व कप में खेलते हुए सुपर-12 में भी प्रवेश किया।  

इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) में अब टीमों की संख्या कितनी हो गई है और नई जुड़ने वाली टीमें कौन सी हैं? What is the number of teams in the Indian Premier League (IPL) now and what are the newly joined teams?

आईपीएल में टीमों की संख्या 8 से बढ़कर 10 हो गई है। दो नई टीमें लखनऊ और अहमदाबाद हैं। लखनऊ टीम को गोयनका समूह की कंपनी आरपी-एसजी ने खरीदा है जबकि अहमदाबाद टीम को अंतर्राष्ट्रीय इक्विटी निवेश फर्म सीवीसी कैपिटल ने खरीदा है।

आईपीएल 2021 का खिताब किस टीम ने जीता है? Which team has won the IPL 2021 title?

आईपीएल 2021 का खिताब चेन्नई सुपर किंग्स ने कोलकाता नाइटराइडर्स को हराकर जीत लिया। यह चेन्नई का चौथा आईपीएल खिताब है। मुंबई इस खिताब को पांच बार और केकेआर दो बार जीत चुकी है। एक-एक बार इसे राजस्थान रॉयल्स, डेक्कन चार्जर्स और सनराइजर्स ने जीता है। इस टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा रन सीएसके के ऋतुराज गायकवाड़ (635) ने बनाए जबकि सबसे ज्यादा विकेट आरसीबी के हर्षल पटेल (32) ने लिये। 

महिला वन डे क्रिकेट में शतक लगाने वाली सबसे युवा खिलाड़ी कौन बनी हैं? Who has become the youngest player to score a century in Women's One Day Cricket?

आयरलैंड की एमी हंटर अपने 16वें जन्मदिन पर जिंबाब्वे के खिलाफ 121 रन (नाबाद) की पारी खेलकर महिला वनडे में शतक लगाने वाली सबसे युवा खिलाड़ी बन गई हैं। इससे पहले भारत की मिताली राज ने 1999 में 16 साल 205 दिन की उम्र में आयरलैंड के खिलाफ शतक लगाया था।

भारत में 2022 में 11 से 30 अक्टूबर के बीच फुटबाल का कौन सा अंतर्राष्ट्रीय टूर्नामेंट होने जा रहा है? Which international football tournament is going to be held in India from October 11 to 30 in 2022?

भारत में अंडर-17 महिला विश्व फुटबाल प्रतियोगिता का आयोजन 2022 में होने जा रहा है। 11 अक्टूबर 2021 को इसका शुभंकर 'इभा' लांच किया गया। इभा एक एशियाई शेरनी है जो महिला शक्ति का प्रतिनिधित्व करती है।

2021 का यूएफा नेशंस लीग का खिताब किस देश ने जीता है? Which country has won the 2021 UEFA Nations League title?

फुटबाल का यह प्रतिष्ठित खिताब फ्रांस ने स्पेन को 2-1 से हराकर जीता है। टूर्नामेंट का फाइनल इटली के मिलान में खेला गया।

आईपीएल के एक सत्र में सबसे ज्यादा रन और सबसे ज्यादा विकेट लेने का रिकार्ड किन खिलाड़ियों के नाम है? Which players have the record of taking most runs and most wickets in a season of IPL?

आईपीएल के एक सत्र में सबसे ज्यादा रन का रिकार्ड विराट कोहली (973 रन) के नाम है। एक सत्र में सबसे ज्यादा विकेट लेने का रिकार्ड ड्वेन ब्रावो और हर्षल पटेल के नाम है। दोनों ने 32-32 विकेट लिये हैं। हर्षल पटेल ने 32 विकेट इसी सत्र (2021) में लिये हैं।

विश्व कुश्ती चैंपियनशिप के फाइनल में पहुंचने वाली पहली भारतीय महिला खिलाड़ी कौन बनी हैं?Who has become the first Indian female player to reach the finals of the World Wrestling Championship?

पहलवान अंशु मलिक विश्व कुश्ती चैंपियनशिप के फाइनल में पहुंचने वाली पहली भारतीय महिला पहलवान बनी हैं। वे इस चैंपियनशिप में रजत पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला पहलवान भी बनी हैं। यह प्रतियोगिता ओस्लो (नार्वे) में खेली गई। पुरुषों में भारत की ओर से अभी तक केवल दो पहलवान सुशील कुमार और बजरंग पुनिया विश्व कुश्ती चैंपियनशिप के फाइनल में पहुंच पाए हैं।

प्रसिद्ध खिलाड़ी मैनी पैकियाओ ने 42 वर्ष की उम्र में खेल से संन्यास ले लिया। मैनी किस खेल के महान खिलाड़ी कहे जाते हैं? Legendary player Manny Pacquiao retired from the sport at the age of 42. Manny is said to be the great player of which sport?

मैनी पैकियाओ का नाम महान मुक्केबाजों में लिया जाता है। फिलीपींस के मैनी ने आठ वर्गों में विश्व चैंपिनय बनने का गौरव हासिल किया। उन्होंने अपने खेल करियर में 72 मुकाबले खेले। इनमें से 62 जीते। आठ में वह हारे जबकि दो मुकाबले ड्रा रहे।

देश का पहला स्पोर्ट्स आर्बिट्रेशन सेंटर कहां खोला गया है? Where has the country's first Sports Arbitration Center been opened?

देश का पहला 'स्पोर्ट्स आर्बिट्रेशन सेंटर ऑफ इंडिया' अहमदाबाद में खोला गया है। यह एक स्वतंत्र पंचाट होगा जो खेल से जुड़े विवादों का समाधान करेगा। यानी खेल संघों के अंदर के विवाद, उनके बीच के विवाद, खिलाड़ियों और कोच से संबंधित विवाद इस पंचाट में सुलझाए जाएंगे। इससे देश में खेल क्षेत्र के विस्तार में मदद मिलेगी। 

2022 के राष्ट्रमंडल खेल कहां खेले जायेंगे? Where will the 2022 Commonwealth Games be played?

2022 के राष्ट्रमंडल खेल ब्रिटेन के बर्मिंघम में खेले जायेंगे।

भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान बिशन सिंह बेदी के जीवन पर हाल ही में आई पुस्तक का क्या नाम है? What is the name of the recently published book on the life of former Indian cricket team captain Bishan Singh Bedi?

इस पुस्तक का नाम है- 'द सरदार ऑफ स्पिन : ए सेलिब्रेशन ऑफ द आर्ट एंड ऑफ बिशन सिंह बेदी'। इसे सचिन बजाज ने लिखा है। इसके परामर्श संपादक पूर्व क्रिकेटर वेंकट सुंदरम हैं।

सुदिरमन कप किस खेल का प्रसिद्ध टूर्नामेंट है? Sudirman Cup is the famous tournament of which sport?

सुदिरमन कप बैडमिंटन का मिक्स्ड टीम टूर्नामेंट है। यह हर दो साल के बाद होता है। इस टूर्नामेंट में देशों की टीमें भाग लेती हैं और दो देशों की टीमों के बीच पुरुष और महिला एकल, पुरुष और महिला युगल और मिक्स्ड डबल मैच होते हैं। इंडोनेशिया के पूर्व बैडमिंटन खिलाड़ी डिक सुदिरमन के नाम पर इंडोनेशिया के खेल संघ ने इसे 1989 में शुरू किया था। 2021 का टूर्नामेंट फिनलैंड में खेला जा रहा है। 2019 में यह टूर्नामेंट चीन में हुआ था और चीन ही विजेता बना था।

आईपीएल में अब तक कितनी हैट्रिक  बनाई गई हैं? How many hat-tricks have been scored in IPL so far?

आईपीएल में अब तक 20 हैट्रिक बनी हैं। 26 सितंबर 2021 को रायल चैलेंजर्स बेंगलुरू के लिये खेलते हुुए हर्षल पटेल ने मुंबई के खिलाफ हैट्रिक ली। आईपीएल में ऐसा करने वाले वे 17वें गेंदबाज बने।

टी-20 क्रिकेट में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले भारतीय खिलाड़ियों में कौन शीर्ष पर है? Who is the top Indian player to score the most runs in T20 cricket?

विराट कोहली ने सभी तरह के टी-20 मैचों में 10 हजार रने पूरे कर लिये हैं और ऐसा करने वाले वह पहले भारतीय जबकि विश्व के पांचवें खिलाड़ी बन गए हैं।

100 फार्मूला वन ग्रांड प्रिक्स रेस जीतने वाले दुनिया के पहले रेसिंग ड्राइवर कौन बने हैं? Who has become the first racing driver in the world to win 100 Formula One Grand Prix races?

ब्रिटेन के लुइस हैमिल्टन ने रूस के सोची में 26 सितंबर को रूस ग्रांड प्रिक्स जीतने के साथ अपने करियर की सौवीं फार्मूला वन रेस जीत ली। हैमिल्टन मर्सिडीज पर सवार थे। वे फार्मूला वन रेस के सबसे युवा विश्व चैंपियन भी हैं।

क्रिकेट में नाइट वॉचमैन का क्या अर्थ होता है?

जब किसी टेस्ट मैच के दौरान दिन का खेल खत्म होने के कगार पर होता है और उस समय बल्लेबाजी कर रही टीम का कोई विकेट गिर जाता है तो ऐसे में किसी विशेषज्ञ बल्लेबाज को मैदान पर नहीं उतारा जाता। बल्लेबाजी करने वाली टीम नहीं चाहती कि उसका एक और विशेषज्ञ बल्लेबाज इस नाजुक समय में (जब मैदान पर अंधेरा भी घिर आता है) आउट हो जाए और विपक्षी टीम को अगली सुबह के लिए मनोवैज्ञानिक लाभ मिल जाये। इसके लिये किसी पुछल्ले बल्लेबाज को भेजा जाता है और उसे विकेट पर टिककर विकेट गिरने से बचाना होता है। यदि उसका विकेट गिर भी जाता है तो टीम को ज्यादा नुकसान नहीं होता है। यह नाम इसलिए चर्चा में है क्योंकि बिशन सिंह बेदी की अभी आई पुस्तक में यह वाकया है कि बेदी ने एक टेस्ट में कप्तान के रूप में कपिल देव को बतौर नाइट वॉचमैन मैदान पर भेजा, लेकिन  कपिल देव गेंद रोकना ही नहीं जानते थे। उन्होंने 16 गेंदों में 25 रन बना डाले और आउट भी हो गए। इस पर बेदी उन पर भड़क गए कि तुम नाइट वॉचमैन का मतलब भी नहीं जानते? तुम अब कभी  नाइट वॉचमैन के रूप में मैदान पर नहीं जाओगे। यहां बताते चलें कि आस्ट्रेलिया के जेसन गिलेस्पी बांग्लादेश के खिलाफ नाइट वॉचमैन के रूप में खेलते हुए दोहरा शतक (201 नाबाद) बना चुके हैं।

क्रिकेट में अब 'बैट्समैन' की जगह कौन सा शब्द इस्तेमाल करने का फैसला हुआ है? Which word has now been decided to be used in place of 'batsman' in cricket?

क्रिकेट में अब 'बैट्समैन' की जगह 'बैटर' शब्द का इस्तेमाल होगा। अभी तक बल्लेबाजी करने वाली महिला खिलाड़ी को भी 'बैट्समैन' कहा जाता था। जेंडर न्यूट्रल शब्दवाली का प्रयोग करने की कोशिश में क्रिकेट की सर्वोच्च संस्थान मैरिलबोन क्रिकेट क्लब (एमसीसी) ने अब 'बैटर' शब्द को अपनाया है जो तुरंत प्रभाव से लागू भी कर दिया गया है।

महिला क्रिकेट में 20 हजार रन बनाने वाली पहली क्रिकेटर कौन बनी हैं? Who has become the first cricketer to score 20,000 runs in women's cricket?

भारत की मितारी राज 20 हजार रन बनाने वाली पहली महिला क्रिकेटर बनी हैं। उन्होंने 21 सितंबर 2021 को आस्ट्रेलिया के  खिलाफ वन डे मैच के दौरान यह इतिहास रचा।

भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व फिटनेस कोच बासु शंकर ने कौन सी किताब लिखी है? Which book has been written by Basu Shankar, former fitness coach of the Indian cricket team?

बासु शंकर ने फिटनेस के ऊपर ही '100, 200 प्रैक्टिकल एप्लीकेशन इन स्ट्रेंथ एंड कंडीशनिग' नामक किताब लिखी है।

किस देश की क्रिकेट टीम पाकिस्तान में मैदान पर पहुंचकर भी सुरक्षा कारणों से अपने देश वापस लौट गई? Which country's cricket team returned to their country due to security reasons even after reaching the ground in Pakistan?

पाकिस्तान में वनडे और टी-20 मैच खेलने पहुंची न्यूजीलैंड टीम खिलाड़ियों की सुरक्षा को खतरा होने के अलर्ट के बाद मैदान पर आने के बावजूद वापस लौट गई।

क्रिकेट में मांकडिंग क्या है? What is Mankading in Cricket?

गेंदबाजी छोर का बल्लेबाज अगर गेंदबाज के गेंद फेंकने से पहले क्रीज से बाहर निकल जाता है और उसके बाद गेंदबाज गेंद फेंकने के बजाय अपने छोर पर लगे स्टंप की गिल्लियां गिरा देता है तो बल्लेबाज आउट माना जाता है। आउट होने के इस तरीके को  'मांकडिंग' कहा जाता है। मांकडिंग नाम भारतीय खिलाड़ी वीनू मांकड़ के नाम पर रखा गया है। क्योंकि वीनू मांकड़ ने ही क्रिकेट इतिहास में पहली बार किसी बल्लेबाज को इस तरीके से आउट किया था। यह शब्द इसलिये चर्चा में है क्योंकि कैमरून की 16 साल की गेंदबाज मेवा डाउमा ने 13 सितंबर 2021 को युंगाडा की टीम के चार बल्लेबाजों को मांकडिंग के जरिये रन आउट किया। यह मैच आईसीसी महिला टी-20 विश्व कप का क्वालीफाइंग मैच था।

अमेरिकी ओपन 2021 का पुरुष और महिला एकल खिताब किसने जीता? Who won the men's and women's singles title of US Open 2021?

रूस के डेनिल मेदवेदव ने सर्बिया के नोवाक जोकोविक को हराकर अमेरिकी ओपन का पुरुष एकल का खिताब जीत लिया। महिला एकल खिताब ब्रिटेन की एम्मा राडूकानू ने कनाडा की लैला फर्नांडीज को हराकर जीता है।

- लव कुमार सिंह

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Monday, 20 September 2021

टी-20 विश्व कप : क्या भारतीय टीम की जीत की संभावनाएं अभी से आधी नहीं हो गई हैं?

टी-20 विश्व कप :  क्या भारतीय टीम की जीत की संभावनाएं अभी से आधी नहीं हो गई हैं?


T20 World Cup: Haven't the Indian team's chances of winning been halved now?


भारतीय क्रिकेट के कर्णधारों, क्रिकेट में सक्रिय विभिन्न लॉबी और मीडिया के अनेक धड़ों ने क्या टी-20 विश्व कप में अभी से भारतीय टीम की संभावनाएं 50 प्रतिशत कम नहीं कर दीं है? भारतीय क्रिकेट टीम की कप्तानी के संबंध में गुप्त बैठकों को लीक कराने, विभिन्न प्रकार की बे-सिरपैर की खबरें प्लांट कराने और मीडिया द्वारा अपनी पसंद के हिसाब से खबरें लिखने से तो कुछ ऐसा ही महसूस होता है।

इंग्लैंड में भारतीय क्रिकेट टीम अच्छा प्रदर्शन कर रही थी। वास्तव में पिछले कुछ वर्षों में भारतीय टीम ने शानदार प्रदर्शन किया है। फाइनल में हारे जरूर हैं, लेकिन फाइनल तक क्या साधारण प्रदर्शन से पहुंचा जा सकता है? इस अच्छे प्रदर्शन के बावजूद टी-20 विश्व कप के लिये टीम की घोषणा होते ही जैसे किसी ने मधुमक्खी के छत्ते में हाथ डाल दिया है। टी-20 विश्व कप में यदि विराट कोहली की कप्तानी में टीम संतोषजनक प्रदर्शन नहीं करती है तो आप कोहली को कप्तानी से हटा सकते थे। यह आपके अधिकार क्षेत्र में आता है, लेकिन इसके लिये अभी से हल्ला मचवाने की क्या जरूरत थी?

केवल इतना ही नहीं, अगले कोच के लिये भी हल्ला मचा दिया गया और हल्ला भी उन अनिल कुंबले के लिये जिनका विराट कोहली से मनमुटाव हो चुका है, जिसके चलते कुंबले को कोच का पद छोड़ना पड़ा था।

लेकिन भारतीय क्रिकेट को हानि पहुंचाने वालों का दिल इससे भी नहीं भरा। इसके बाद सूत्रों के हवाले से तमाम तरह की बे-सिरपैर की खबरें मीडिया में चल रही हैं। कहा जा रहा है कि विराट कोहली, रोहित शर्मा को उप कप्तान के पद से हटाना चाहते थे। अब बताइए, कोहली लिखते हैं कि उन्होंने टी-20 की कप्तानी छोड़ने के निर्णय से पहले जिन लोगों से बात की उनमें रोहित भी शामिल थे, जबकि मीडिया लिख रहा है कि वह भावी कप्तान (रोहित) को हटाना चाहते थे। क्या कोहली इतने नादान हैं कि उन्हें यह ना पता हो कि जब वे कप्तानी छोड़ रहे हैं तो उनके बाद रोहित ही कप्तान होंगे। ऐसे में वे रोहित को हटाने की बात कैसे कह सकते हैं?

कहा/लिखा जा रहा है कि सूत्रों के अनुसार भारतीय टीम में बगावत हो गई है। कई खिलाड़ियों ने विराट कोहली के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। लेकिन किस खिलाड़ी ने मोर्चा खोल दिया है? कोई भी नाम बताने को तैयार नहीं है। अगर ये सारी बातें सच भी मान ली जाएं तो बताइये ऐसी टीम के विश्व कप जीतने की संभावना कैसी होगी जिसमें खिलाड़ियों ने बगावत कर दी हो और जिसके कप्तान और उप कप्तान में कथित रूप से इतनी तनातनी हो?

ऐसी टीम के विश्व कप जीतने की कितनी संभावना होगी जिसके कप्तान के मन में भविष्य को लेकर भारी उथलपुथल मचा दी गई हो?

मीडिया का मनमाना रुख देखिये। दैनिक जागरण अखबार का उदाहरण देता हूं। इसके रिपोर्टर अभिषेक त्रिपाठी, विराट कोहली के टी-20 की कप्तानी छोड़ने की घोषणा से पहले अलग-अलग फार्मेट में अलग-अलग कप्तान के समर्थन में लिखते रहे हैं। लेकिन कोहली की घोषणा के बाद वह लिखते हैं कि क्रिकेट बोर्ड ‘विराट, रोहित, विराट’ के फेर में नहीं पड़ना चाहेगा। यानि वह लिखते हैं कि 2022 के टी-20 विश्व कप में रोहित को कप्तान बनाने के बाद क्रिकेट बोर्ड नहीं चाहेगा कि 2023 के वन-डे विश्व कप में फिर से कोहली को कप्तान बनाए। यानी अब रिपोर्टर चाहता है कि एक ही कप्तान रहे, बार-बार बदलाव ना हो और कोहली से वनडे की कप्तानी भी छीन ली जाए।

कप्तान के रूप में विराट कोहली की अपनी कमियां हैं, इससे कोई इनकार नहीं कर सकता, लेकिन यह भी दिख रहा है कि उनके खिलाफ जबर्दस्त लॉबी काम कर रही है। विराट का खेल बिगाड़ने में कुछ परिस्थितियों का भी हाथ रहा है। कहा जाता है कि कोई व्यक्ति उतना ही अच्छा कप्तान होता है, जितनी अच्छी उसकी टीम होती है। आईपीएल ने इस लिहाज से विराट कोहली का बहुत नुकसान किया है। उन्हें आरसीबी के किसी भी सीजन में एक टूर्नामेंट जिताऊ टीम नहीं मिली। उधर रोहित शर्मा भाग्यशाली रहे कि मुंबई इंडियन में उनके पास हमेशा ऐसी टीम रही जिसमें करीब आधा दर्जन खिलाड़ी अकेले दम पर मैच जिताने की क्षमता रखते हैं।

कुल मिलाकर, एक खेल प्रेमी के रूप में मन खट्टा है। टी-20 विश्व कप से पहले, भारतीय खेमे का माहौल बहुत खराब कर दिया गया है। उम्मीद ही कर सकते हैं कि इस सब का टीम के प्रदर्शन पर कोई बुरा असर नहीं पड़ेगा। उम्मीद ही कर सकते हैं कि मेंटोर धोनी और कोच रवि शास्त्री के बीच सही तालमेल रहे। चिंता इस बात की भी है कि कोहली कोई शांत व्यक्ति नहीं हैं। यदि उन्हें ठीक से संभाला नहीं गया तो वे जल्दी ही टीम से ही विदा न ले लें। भगवान करें ऐसा कुछ ना हो।

- लव कुमार सिंह 

#ViratKohli, #RohitSharma, #IndianCricket, #Dhoni, #Sports, #TeamIndia, #T20WorldCup

How will the Indian team perform in the T20 World Cup?


Wednesday, 23 June 2021

कोहली एंड कंपनी को अपने घुटने और दिल खराब नहीं करने दूंगा

Won't let Kohli & Company ruin my knees and heart

देवियों और सज्जनों! हमारे 50 साला पड़ोसी के घुटने बोल गए हैं। वे अपने दिल से भी लाचार हो गए हैं। पता है इल्जाम किस पर आया है? पहले महेंद्र सिंह धोनी, अब विराट एंड कंपनी का नाम आया है। आपको भले ही इस पर हंसी आए, पर पड़ोसी इस इल्जाम पर पूरी तरह गंभीर हैं। चलिए कुछ विस्तार से बताते हैं कि असल में क्या तस्वीर है।

हमारे पड़ोसी कहते हैं क्रिकेटर खुद तो दौड़कर अल्ट्रा फिट रहते हैं मगर हमसे कहते हैं- सारा दिन बैठकर मैच देखो। फुटबालर मैसी भी नब्बे मिनट में छुट्टी दे देता है। साइना-सिंधु इससे भी कम समय लेती हैं। हिमा दास और दुती चंद तो दस-ग्यारह सेकेंड में ही बाय बोल जातीं हैं। लेकिन क्रिकेटर सारा दिन निचोड़ लेते हैं।

“फिर टीवी के सामने सारा दिन क्यों बैठते हैं?” हमने पूछा।

“अजी बैठना पड़ता है इनके लिए। हम इनके जबरा फैन जो ठहरे।”

लेकिन बैठने में भी हालात अजीब होते हैं। अब देखिए ना, एक अंतरराष्ट्रीय मैच में विराट की पारी लड़खड़ाई तो पड़ोसी बेचैन होकर बिस्तर पर उकड़ू बैठ गए। हम भी उस दिन पड़ोसी से मिलने गए थे और पास में एक कुर्सी पर बैठे थे। पड़ोसी के इस मुद्रा में आते ही संयोगवश विराट के बल्ले से तुरंत चार रन निकल गए। पड़ोसी बिस्तर पर अधलेटे हुए कि विराट फिर गेंदबाज के सामने लाचार दिखा। पड़ोसी फिर उकडू बैठे तो गेंद सीमारेखा के पार। चमत्कार से अभिभूत पड़ोसी इसके बाद उकड़ू मुद्रा में ही जम गए। विराट के बल्ले से रन पे रन निकलते चले गए।

विराट दौड़ते-दौड़ते 98 पर पहुंच गया, मगर इधर पड़ोसी का घुटना 98 साला बुजुर्ग सा जम गया। इसी के साथ पेट में गया खाया-पीया अपनी सीमारेखा पर आ गया। तभी विराट के शतक का शोर मचा। शोर सुनकर पड़ोसी की पत्नी तेजी से कमरे में आई। पहले टीवी पर विराट को देखा, फिर पति और मुझ पर नजर घुमाई। कोहली को देखकर उसने ताली बजाई। लेकिन पति को देखा तो जोर से चिल्लाई- “अरे रुको...बिस्तर पर ही निपटोगे क्या?”

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दस जुलाई दो हजार उन्नीस। वन डे क्रिकेट का विश्व कप। पड़ोसी उकड़ू बैठे, एक पैर पर खड़े हुए, लेकिन कुछ भी अच्छा नहीं हुआ। भारत विश्व कप से बाहर हो गया। पड़ोसी का दिल टूट गया। उनका आरोप है कि क्रिकेटर बहुत कष्ट पहुंचाते हैं। ये उम्मीदों के पहाड़ पर चढ़ाते हैं और फिर वहां से नीचे की राह दिखाते हैं। ये ऐसा एक बार नहीं कई बार दोहराते हैं। पड़ोसी की मांग है कि उन जैसे सारे दिन टीवी के सामने जमे रहने वाले क्रिकेट के दीवानों के लिए अंतर्राष्ट्रीय मैच में भारत की हार पर मुआवजा दिया जाना चाहिए।

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भारत में 23 जून 2021 की रात। फिर वही कहानी दोहराई गई। न्यूजीलैंड के खिलाफ विश्व टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल में कोहली एंड कंपनी ने फिर से अपने प्रशंसकों की वैसी ही हालत कर दी है कि बीसीसीआई से मुआवजा मांगने का मन करने लगा। गुस्सा विराट कोहली पर भी आया। बेशक विराट कोहली महान हैं, लेकिन बड़े मैचों में कहां है उनकी प्रतिबद्धता, उनका समर्पण, उनकी एकाग्रता? न्यूजीलैंड की पारी के दौरान एक समय महोदय स्लिप में नाचते हुए दिखे थे जबकि उस समय नाचने का कोई कारण नहीं था। विश्व कप 2015 के सेमीफाइनल में आपने निराश किया। चैंपियंस ट्राफी के फाइनल में आपने दुखी कर डाला, फिर विश्व कप 2019 के सेमीफाइनल में आपने रुला डाला। अब टेस्ट क्रिकेट चैंपियनशिप के बाद हमारा बुरा हाल है। हमें आपकी महानता पर कोई संदेह नहीं, पर बड़े मैचों में अपने प्रदर्शन के बारे में थोड़ा सोचिएगा जरूर।

खैर, किसी तरह अपने दिल को संभालने की कोशिश कर रहा हूं। साथ में यह भी सोचता हूं कि कहीं ये हमारे उकड़ू बैठने या एक पैर पर खड़े होने का दबाव तो नहीं जिसे कोहली एंड कंपनी सहन नहीं कर पाती। मैंने देखा है कि जो दिनभर मैच नहीं देखते, जिन्हें क्रिकेट का कीड़ा ज्यादा नहीं लगा होता, वे ज्यादा परेशान नहीं होते। वे मैच की निष्पक्ष समीक्षा कर रहे होते हैं। लेकिन जो नौकरी से छुट्टी लेकर या जरूरी काम छोड़ धूनी रमा लेते हैं, जो मैच के दौरान मेहमानों से नहीं मिलते, जो अपने जरूरी मिलन रद्द कर देते हैं, वे पड़ोसी की तरह किसी भी हार के बाद बौरा जाते हैं, खिलाड़ियों को कोसते हैं और अपनी हालत खराब कर लेते हैं।

ऐसे ही लोगों से प्रेरणा पाकर पत्रकार बाल की खाल निकालते हैं। ऐसे ही लोगों से घबराकर क्रिकेट बोर्ड कप्तान बदल देता है। ऐसे ही लोगों से घबराकर कई खिलाड़ी संन्यास ले लेते हैं। लेकिन जीत-हार अपने हिसाब से चलती रहती हैं। उन्हें इन चीजों से कोई फर्क नहीं पड़ता। जीत उसी का वरण करती है जो अच्छा खेलता है। जीत उसी को मिलती है जो हार नहीं मानता। जीत उसको भी मिलती है जो घमंड नहीं करता।

इस ज्ञान प्राप्ति के बाद अपन ने भी एक फैसला किया है। खेल प्रेमी बना रहूंगा, पर दिनभर समय जाया नहीं करूंगा। कोहली-रोहित को अपने घुटने और दिल खराब नहीं करने दूंगा। उन्हें कोसूंगा नहीं, गाली नहीं दूंगा, उन पर फटूंगा नहीं। न उन्हें प्रशंसा के पर्वत पर चढाऊंगा। न निराशा के समंदर में डुबोऊंगा। खेल को खेल ही रहना दूंगा। खिलाड़ियों को उन्मुक्त खेलने दूंगा।

- लव कुमार सिंह


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Tuesday, 22 June 2021

ओलंपिक में कंडोम का इंतजाम...खेलों में 'काम' का क्या काम?

  • टोक्यो ओलंपिक में खिलाड़ियों के लिए की गई है डेढ़ लाख कंडोम की व्यवस्था
  • कुछ विशेषज्ञ कहते हैं सेक्स से खेल पर कोई असर नहीं, जबकि कुछ की राय इससे उलट



ओलंपिक के पिछले संस्करण यानी 2016 के रियो ओलंपिक (ब्राजील में) में करीब साढ़े दस हजार खिलाड़ियों के लिए साढ़े चार लाख कंडोम की व्यवस्था खेलगांव में की गई थी। अर्थात प्रति खिलाड़ी 42 कंडोम। 2018 में दक्षिण कोरिया के प्योगंचांग शहर में हुए विंटर ओलंपिक में 2,925 खिलाड़ियों के लिए खेल गांव में एक लाख दस हजार कंडोम की व्यवस्था की गई थी। यानी प्रति खिलाड़ी 27 कंडोम। अप्रैल 2018 में आस्ट्रेलिया के गोल्ड कोस्ट में कॉमनवेल्थ (राष्ट्रमंडल) गेम्स के दौरान भी खिलाड़ियों के लिए करीब एक लाख कंडोम (प्रति खिलाड़ी 16 कंडोम) का इंतजाम किया गया। 
हर बार जब भी ओलंपिक, एशियाड या कॉमनवेल्थ गेम्स होते हैं तो इस प्रकार की खबरें आती हैं। खिलाड़ियों को मुफ्त में कंडोम बांटने की शुरुआत 1988 के सियोल ओलंपिक से हुई थी। उस साल पहली बार खिलाड़ियों को 8500 कंडोम बांटे गए थे। उद्देश्य बताया गया- एड्स जैसी बीमारियों की रोकथाम। उसके बाद से हर ओलंपिक में ऐसा किया जाने लगा और 2016 में कंडोम की संख्या 4 लाख 50 हजार तक पहुंच गई।
लेकिन इस बार के टोक्यो ओलंपिक (23 जुलाई- 8 अगस्त 2021) कोरोना काल में हो रहे हैं। इंसानों के बीच दो गज की दूरी पर जोर दिया जा रहा है। आयोजकों ने कोरोना के खतरे को देखते हुए शारीरिक दूरी के कड़े नियम बनाए हैं। लेकिन इसी के साथ-साथ करीब 11 हजार खिलाड़ियों के लिए 1 लाख 50 हजार मुफ्त कंडोम की व्यवस्था भी की गई है। अब जापान में चुटकुले चल रहे हैं कि जिनमें पर्याप्त शारीरिक दूरी के साथ शारीरिक संबंध बनाने पर व्यंग्य बाण छोड़े जा रहे हैं।

ओलंपिक में कंडोम क्यों?
Why condoms in Olympic?


खेलों के दौरान कंडोम की व्यवस्था करने के पीछे क्या कारण हो सकता है? एक कारण तो सीधा समझ में आता है कि आयोजक खिलाड़ियों को एसटीडी यानी सेक्सुअली ट्रांसमीटेड डिजीज (एड्स आदि) और अवांछित प्रेगनेंसी से बचाना चाहते हैं। 2016 के रियो ओलंपिक के दौरान ब्राजील में जीका वायरस का खौफ भी छाया हुआ था, जिसकी वजह से साढ़े चार लाख कंडोम की व्यवस्था की गई।
लेकिन इसके बाद तुरंत मन में यह सवाल आता है कि आयोजकों को एसटीडी या अवांछित प्रेगनेंसी का खतरा क्यों होता है? खिलाड़ी ओलंपिक या एशियन गेम्स में खेलने जाते हैं या सेक्स करने? हमारे यहां तो खिलाड़ियों से कहा जाता है कि खेल पर ध्यान दो, ध्यान को भटकने मत दो... तो क्या जब ओलंपिक या कॉमनवेल्त गेम्स में इस कदर सेक्स शामिल रहता है तो खिलाड़ी रिकॉर्ड कैसे बनाते हैं? कैसे पदक जीतते हैं? कैसे अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर पाते हैं?

खेल के दौरान सेक्स नुकसानदायक या लाभकारी? 
sex during sports is harmful or beneficial?


खेलों से पहले, खेलों के दौरान या खेलों के बाद सेक्स, विदेशों में खेल क्षेत्र में बहस का एक अच्छा-खासा मुद्दा रहा है। कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि जो एथलीट अपने शारीरिक दमखम के उच्च स्तर पर होते हैं, उनके खेल प्रदर्शन पर सेक्स का मामूली प्रभाव होता है। कुछ विशेषज्ञ कहते हैं कि 20 से 30 मिनट का शारीरिक संसर्ग हल्की-फुल्की जॉगिंग के समान ही होता है।

हालांकि अन्य बहुत से विशेषज्ञ इससे सहमत नहीं हैं और उनका मानना है कि खेलों के दौरान सेक्स खिलाड़ियों के प्रदर्शन और एक जगह ध्यान लगाने की प्रक्रिया को बाधित करता है। इससे खिलाड़ी का ध्यान भटकता है।

ध्यान भटकने का मामला इस पर भी निर्भर करता है कि खिलाड़ी किस देश का है। यदि खिलाड़ी नार्वे, स्वीडन जैसे देशों का है जहां फ्री सेक्स जैसी अवधारणाएं काम करती हैं तो संभवतः उसका ध्यान ज्यादा नहीं भटकेगा, लेकिन यदि खिलाड़ी भारत जैसे देश का हो तो इस प्रकार की चीजें प्रदर्शन को जरूर प्रभावित करती हैं। भारत में तो हॉकी और क्रिकेट में कई पुरुष खिलाड़ियों की कहानियों प्रचलित हैं कि ऐसी ही चीजों ने उनके खेल करियर को बर्बाद कर दिया।
यह भी बताया गया है कि चूंकि ओलंपिक और कॉमनवेल्थ गेम्स जैसे मंचों पर खिलाड़ी शारीरिक स्वास्थ्य और दमखम की दृष्टि से अपने उच्च स्तर पर होते हैं, इसलिए उनका लिबिडो (सेक्स की इच्छा) स्तर बढ़ा हुआ होता है। इस दौरान उन्हें खेलगांव में दस से पंद्रह दिन बाहरी दुनिया से कटकर गुजारने होते हैं। इस दौरान उनकी मुलाकात दुनियाभर के एथलीटों से होती हैं और इनमें से अनेक मुलाकातों का अंत शारीरिक संबंध के रूप में सामने आता है।

यह भी तय होता है कि सभी खिलाड़ी पदक नहीं जीतेंगे। हजारों खिलाड़ी ओलंपिक जैसे आयोजनों के लिए क्वालीफाई तो करते हैं, लेकिन यह उन्हें और उनके देश को भी पता होता है कि उनके लिए ओलंपिक में भाग लेना ही एक उपलब्धि है। ऐसे खिलाड़ियों पर पदक जीतने का ज्यादा दबाव भी नहीं होता है। ऐसे खिलाड़ी मौजमस्ती पर पूरा ध्यान लगाते हैं। बहुत से खिलाड़ियों की स्पर्धा पहले खत्म हो जाती है तो उसके बाद वे इस प्रकार की गतिविधियों में शामिल हो जाते हैं।

टिंडर डेटिंग एप
Tinder dating app


ओलंपिक और इसी प्रकार के आयोजनों के दौरान 'टिंडर' और ऐसे ही कई नाम वाले डेटिंग एप भी सक्रिय रहते हैं, जिनके जरिये खिलाड़ी अपने लिए पार्टनर चुन सकते हैं। रूस के सोच्चि में 2014 में हुए विंटर ओलंपिक में 'टिंडर डेटिंग एप' बहुत चर्चा में रहा था, जिसका प्रयोग करते हुए खिलाड़ियों ने एक-दूसरे से मित्रता स्थापित की थी।

खिलाड़ी, केवल दूसरे खिलाड़ियों से ही मित्रता नहीं करते बल्कि उन स्वयंसेवकों, स्वयंसेविकाओं से भी संबंध बना लेते हैं जिन्हें उनकी मदद के लिए तैनात किया जाता है। ऐसे वालंटियर की संख्या हजारों में होती है। कुछ खिलाड़ी तो इन वालंटियर के साथ जबरदस्ती करते भी पाए गए हैं।

2012 में एक ओलंपिक तैराक ने खेल चैनल ईएसपीएन को जानकारी दी कि 70 से 75 प्रतिशत ओलंपियन, ओलंपिक के दौरान सेक्स करते हैं। इस तैराक ने यह भी स्वीकार किया कि पिछले ओलंपिक में उनकी एक गर्लफ्रेंड बन गई थी और वह उनकी बहुत बड़ी गलती थी। लेकिन इस बार (लंदन ओलंपिक) वह बहुत सतर्कता के साथ इससे (गर्लफ्रेंड) दूर हैं।

तैराक की यह बात इसलिए अविश्वसनीय नहीं लगती कि जब दिल्ली में 1982 में एशियाड हुए थे तो मैं नौंवी कक्षा में पढ़ता था। मुझे अब भी याद है कि तब मैंने देश के अखबारों में इस प्रकार की कई खबरें पढ़ीं थीं कि एशियाड खत्म होने के बाद दिल्ली स्थित खेलगांव में कंडोम के ढेर लगे हुए थे, जबकि उस समय तक तो आयोजकों की तरफ से मुफ्त कंडोम बांटने की व्यवस्था भी नहीं शुरू हुई थी।

कुल मिलाकर, ओलंपिक, एशियाड और कॉमनवेल्थ गेम्स में निश्चित ही 'खेल' केंद्रबिंदु में रहता है, लेकिन नेपथ्य में 'काम' भी कम नहीं होता है।
- लव कुमार सिंह
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Sunday, 13 June 2021

सुरेश रैना ने भी आत्मकथा लिखी...जानें प्रमुख खिलाड़ियों की आत्मकथाओं के नाम

Suresh Raina also wrote autobiography... know the names of biographies of prominent players

भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व दिग्गज बल्लेबाज सुरेश रैना ने भी अपनी आत्मकथा लिख डाली है। 14 जून 2021 को इस किताब को ऑनलाइन लांच किया गया है। इस किताब में उन्होंने अपने क्रिकेट जीवन के सफर से जुड़े तमाम पहलुओं के बारे में विस्तार से बताया है।

सुरेश रैना ने अपनी आत्मकथा का नाम 'बिलीव' रखा है। इसमें उनके गाजियाबाद से कानपुर, लखनऊ होते हुए टीम इंडिया और फिर आईपीएल के सफर के बारे में रोचक ढंग से बताया गया है। इसमें उनके यूपी के स्पोर्ट्स हॉस्टल में रहने के दौरान के पलों को खासतौर से शामिल किया गया है। सुरेश रैना का कहना है इस किताब को पढ़कर युवा खिलाड़ी काफी कुछ सीख सकते हैं और अपने सपनों को सच करने की दिशा में उचित कदम उठा सकते हैं।

सुरेश रैना से पहले कई अन्य खिलाड़ी भी अपनी आत्मकथाएं लिख चुके हैं। कुछ प्रमुख आत्मकथाओं का विवरण इस प्रकार है--

सौरव गांगुली की आत्मकथा- 'ए सेंचुरी इज नॉट इनफ' 

सौरव ने इस किताब को बीसीसीआई के पूर्व अध्यक्ष जगमोहन डालमिया को समर्पित किया है और लिखा है कि यदि डालमिया न होते तो सौरव आज इस मुकाम पर न होते। सौरव ने इसमें अपने पहले रूममेट और दिग्गज बल्लेबाज दिलीप वेंगसरकर के  साथ पहली कड़वी मुलाकात के साथ ही यह भी बताया है कि कैसे वेंगसरकर ने उन्हें कप्तान से पूछे बिना ड्रॉप कर दिया था। भारतीय टीम के पूर्व कोच ग्रेग चैपल के साथ विवाद का किस्सा तो इस किताब में है ही, सौरव के कैरियर में बाधा पहुंचाने वालों के बारे में भी खुलकर लिखा गया है। इसमें अजहरुद्दीन की कप्तानी पर भी सवाल हैं तो सचिन से लगाव के बावजूद उनकी कमियां भी बताई गई हैं। राहुल द्रविड़ द्वारा चैपल का साथ देने का जिक्र भी है। सौरव ने इसमें क्षेत्रवाद का भी जिक्र किया है और यह भी बताया है कि कैसे वे धोनी, सहवाग, हरभजन, जहीर जैसे खिलाड़ियों को चयनकर्ताओं से लड़कर टीम में लाए। सौरव ने इसमें यह भी खुलासा किया है कि 2007 के पहले टी-20 विश्व कप में वह खेलना चाहते थे लेकिन राहुल द्रविड़ ने उन्हें और सचिन को न खेलने के लिए मना लिया था।

शाहिद आफरीदी की आत्मकथा - 'गेम चेंजर'

2020 में आई यह किताब भारत में खासतौर से इसलिए चर्चा में आई क्योंकि आफरीदी ने इसमें गौतम गंभीर के बारे में तीखी टिप्पणियां की हैं। उन्होंने गंभीर के बारे में लिखा है कि गंभीर का अपना कोई व्यक्तित्व नहीं है। आफरीदी ने इसमें अपनी उम्र को लेकर भी खुलासा किया। इसमें उन्होंने अपनी जन्मतिथि 1975 बताई है, जबकि आधिकारिक रिकार्ड में यह 1980 है। यानी पांच साल का फर्क।

वीवीएस लक्ष्मण की आत्मकथा- '281 एंड बियांड'

स्टाइलिश बल्लेबाज रहे वीवीएस लक्ष्मण ने इस किताब का शीर्षक ईडन गार्डंस में आस्ट्रेलिया के खिलाफ अपनी 281 रनों की ऐतिहासिक पारी से जोड़कर रखा है। उनकी इस पारी ने उस यादगार श्रृंखला का रुख ही बदल दिया था। यह किताब 2018 में सामने आई थी। खेल पत्रकार आर.कौशिक इसके सह लेखक हैं। लक्ष्मण ने इस किताब में अपने जीवन के उतार-चढ़ावों के अलावा इस बात का भी जिक्र किया है कि कैसे कुछ  खिलाड़ी बहुत प्रतिभावान होते हुए भी अपनी सफलता को संभाल नहीं पाते हैं और उनका खेल करियर बहुत जल्द खत्म हो जाता है।

सचिन तेंदुलकर की आत्मकथा- 'प्लेइंग इट माय वे'

सचिन की आत्मकथा 2014 में प्रकाशति हुई। 2015 में इसका हिंदी संस्करण 'मेरी आत्मकथा' के नाम से बाजार में आया। इस पुस्तक के सह लेखक बोरिया मजूमदार हैं। इस किताब में सचिन के शुरुआती दिनों, उनके 24 साल के अंतरर्राष्ट्रीय करियर और जीवन के बारे में उनके उस दृष्टिकोण को सामने लाया गया है जो जिसे अभी तक लोग नहीं जानते थे। सचिन की यह किताब बहुत चर्चित रही और बेस्ट सेलर भी साबित हुई। इसने भारत में बिक्री के कई रिकार्ड भी तोड़ दिए थे। इस किताब ने लिम्का बुक ऑफ रिकार्ड्स की कथा और गैर कथा श्रेणी में सबसे ज्यादा बिकने वाली पुस्तक का रिकार्ड बनाया था।

इस किताब में सचिन ने इस बात का भी सनसनीखेज खुलासा किया है कि 2007 के विश्व कप से कुछ माह पहले भारतीय टीम के तत्कालीन कोच ग्रेग चैपल, सचिन के घर आए और सुझाव दिया कि उन्हें राहुल द्रविड़ से कप्तानी संभालनी चाहिए, जो उस समय टीम के कप्तान थे। हालांकि चैपल ने सचिन की इस बात का खंडन किया है। 

इस किताब में कपिल देव पर भी कड़ी और आलोचनात्मक टिप्पणियां की गई हैं। उल्लेखनीय है कि कपिल तब भारतीय टीम के कोच बने थे जब सचिन टीम के कप्तान बने थे और कप्तान के रूप में सफल नहीं रहे थे।

राहुल द्रविड़- 'द नाइस गाय हू फिनिश्ड फर्स्ट'

अपनी टिकाऊ बल्लेबाजी के कारण भारतीय क्रिकेट टीम में 'द वाल' (दीवार) के नाम से जाने गए राहुल द्रविड़ की एक जीवनी 2005 में प्रकाशित हुई जिसका नाम 'द नाइस गाय हू फिनिश्ड फर्स्ट' है। इसे देवेंद्र प्रभुदेसाई ने लिखा है।


अन्य खिलाड़ियों की आत्मकथाएं

  • मेजर ध्यानचंद की आत्मकथा- 'गोल'
  • हॉकी के प्रसिद्ध खिलाड़ी बलबीर सिंह की आत्मकथा- 'गोल्डन हैट्रिक'
  • कपिल देव की आत्मकथा- 'बाई गॉड्स डिक्री'। कपिल ने दो पुस्तकें और लिखीं- 'क्रिकेट माइ स्टाइल' और 'स्ट्रेट फ्राम द हार्ट'
  • रिकी पोंटिंग की आत्मकथा- 'पोंटिंग-एट द क्लोज ऑफ प्ले'
  • शोएब अख्तर की आत्मकथा- 'कंट्रोवर्शियली योर्स'
  • एडम गिलक्रिस्ट की आत्मकथा- 'ट्रू कलर्स'
  • सुनील गावस्कर की आत्मकथा- 'सनीज डेज' (इसके अलावा उन्होंने तीन आत्मकथात्मक पुस्तकें और लिखी हैं। ये हैं- 'आइडल', 'रन एंड रुइंस' और 'वन डे वंडर्स'। 
  • प्रसिद्ध हॉकी खिलाड़ी डेविड बेकहम की आत्मकथा- 'माई साइड'
  • पीटी उषा की आत्मकथा- 'गोल्डन गर्ल'
  • विश्वनाथन आनंद की पुस्तक- 'माई बेस्ट गेम आफ चेस'
  • डॉन ब्रेडमैन की आत्मकथा- 'फेयरवेल टु क्रिकेट'
  • टाइगर वुड्स की पुस्तक- 'हाउ आई प्ले गोल्फ'
  • पेले की आत्मकथा- 'पेले'
  • टेनिस खिलाड़ी मारिया शारापोवा की आत्मकथा- 'अनस्टॉपेबल- माई लाइफ सो फार'
- लव कुमार सिंह