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Monday, 20 September 2021

टी-20 विश्व कप : क्या भारतीय टीम की जीत की संभावनाएं अभी से आधी नहीं हो गई हैं?

टी-20 विश्व कप :  क्या भारतीय टीम की जीत की संभावनाएं अभी से आधी नहीं हो गई हैं?


T20 World Cup: Haven't the Indian team's chances of winning been halved now?


भारतीय क्रिकेट के कर्णधारों, क्रिकेट में सक्रिय विभिन्न लॉबी और मीडिया के अनेक धड़ों ने क्या टी-20 विश्व कप में अभी से भारतीय टीम की संभावनाएं 50 प्रतिशत कम नहीं कर दीं है? भारतीय क्रिकेट टीम की कप्तानी के संबंध में गुप्त बैठकों को लीक कराने, विभिन्न प्रकार की बे-सिरपैर की खबरें प्लांट कराने और मीडिया द्वारा अपनी पसंद के हिसाब से खबरें लिखने से तो कुछ ऐसा ही महसूस होता है।

इंग्लैंड में भारतीय क्रिकेट टीम अच्छा प्रदर्शन कर रही थी। वास्तव में पिछले कुछ वर्षों में भारतीय टीम ने शानदार प्रदर्शन किया है। फाइनल में हारे जरूर हैं, लेकिन फाइनल तक क्या साधारण प्रदर्शन से पहुंचा जा सकता है? इस अच्छे प्रदर्शन के बावजूद टी-20 विश्व कप के लिये टीम की घोषणा होते ही जैसे किसी ने मधुमक्खी के छत्ते में हाथ डाल दिया है। टी-20 विश्व कप में यदि विराट कोहली की कप्तानी में टीम संतोषजनक प्रदर्शन नहीं करती है तो आप कोहली को कप्तानी से हटा सकते थे। यह आपके अधिकार क्षेत्र में आता है, लेकिन इसके लिये अभी से हल्ला मचवाने की क्या जरूरत थी?

केवल इतना ही नहीं, अगले कोच के लिये भी हल्ला मचा दिया गया और हल्ला भी उन अनिल कुंबले के लिये जिनका विराट कोहली से मनमुटाव हो चुका है, जिसके चलते कुंबले को कोच का पद छोड़ना पड़ा था।

लेकिन भारतीय क्रिकेट को हानि पहुंचाने वालों का दिल इससे भी नहीं भरा। इसके बाद सूत्रों के हवाले से तमाम तरह की बे-सिरपैर की खबरें मीडिया में चल रही हैं। कहा जा रहा है कि विराट कोहली, रोहित शर्मा को उप कप्तान के पद से हटाना चाहते थे। अब बताइए, कोहली लिखते हैं कि उन्होंने टी-20 की कप्तानी छोड़ने के निर्णय से पहले जिन लोगों से बात की उनमें रोहित भी शामिल थे, जबकि मीडिया लिख रहा है कि वह भावी कप्तान (रोहित) को हटाना चाहते थे। क्या कोहली इतने नादान हैं कि उन्हें यह ना पता हो कि जब वे कप्तानी छोड़ रहे हैं तो उनके बाद रोहित ही कप्तान होंगे। ऐसे में वे रोहित को हटाने की बात कैसे कह सकते हैं?

कहा/लिखा जा रहा है कि सूत्रों के अनुसार भारतीय टीम में बगावत हो गई है। कई खिलाड़ियों ने विराट कोहली के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। लेकिन किस खिलाड़ी ने मोर्चा खोल दिया है? कोई भी नाम बताने को तैयार नहीं है। अगर ये सारी बातें सच भी मान ली जाएं तो बताइये ऐसी टीम के विश्व कप जीतने की संभावना कैसी होगी जिसमें खिलाड़ियों ने बगावत कर दी हो और जिसके कप्तान और उप कप्तान में कथित रूप से इतनी तनातनी हो?

ऐसी टीम के विश्व कप जीतने की कितनी संभावना होगी जिसके कप्तान के मन में भविष्य को लेकर भारी उथलपुथल मचा दी गई हो?

मीडिया का मनमाना रुख देखिये। दैनिक जागरण अखबार का उदाहरण देता हूं। इसके रिपोर्टर अभिषेक त्रिपाठी, विराट कोहली के टी-20 की कप्तानी छोड़ने की घोषणा से पहले अलग-अलग फार्मेट में अलग-अलग कप्तान के समर्थन में लिखते रहे हैं। लेकिन कोहली की घोषणा के बाद वह लिखते हैं कि क्रिकेट बोर्ड ‘विराट, रोहित, विराट’ के फेर में नहीं पड़ना चाहेगा। यानि वह लिखते हैं कि 2022 के टी-20 विश्व कप में रोहित को कप्तान बनाने के बाद क्रिकेट बोर्ड नहीं चाहेगा कि 2023 के वन-डे विश्व कप में फिर से कोहली को कप्तान बनाए। यानी अब रिपोर्टर चाहता है कि एक ही कप्तान रहे, बार-बार बदलाव ना हो और कोहली से वनडे की कप्तानी भी छीन ली जाए।

कप्तान के रूप में विराट कोहली की अपनी कमियां हैं, इससे कोई इनकार नहीं कर सकता, लेकिन यह भी दिख रहा है कि उनके खिलाफ जबर्दस्त लॉबी काम कर रही है। विराट का खेल बिगाड़ने में कुछ परिस्थितियों का भी हाथ रहा है। कहा जाता है कि कोई व्यक्ति उतना ही अच्छा कप्तान होता है, जितनी अच्छी उसकी टीम होती है। आईपीएल ने इस लिहाज से विराट कोहली का बहुत नुकसान किया है। उन्हें आरसीबी के किसी भी सीजन में एक टूर्नामेंट जिताऊ टीम नहीं मिली। उधर रोहित शर्मा भाग्यशाली रहे कि मुंबई इंडियन में उनके पास हमेशा ऐसी टीम रही जिसमें करीब आधा दर्जन खिलाड़ी अकेले दम पर मैच जिताने की क्षमता रखते हैं।

कुल मिलाकर, एक खेल प्रेमी के रूप में मन खट्टा है। टी-20 विश्व कप से पहले, भारतीय खेमे का माहौल बहुत खराब कर दिया गया है। उम्मीद ही कर सकते हैं कि इस सब का टीम के प्रदर्शन पर कोई बुरा असर नहीं पड़ेगा। उम्मीद ही कर सकते हैं कि मेंटोर धोनी और कोच रवि शास्त्री के बीच सही तालमेल रहे। चिंता इस बात की भी है कि कोहली कोई शांत व्यक्ति नहीं हैं। यदि उन्हें ठीक से संभाला नहीं गया तो वे जल्दी ही टीम से ही विदा न ले लें। भगवान करें ऐसा कुछ ना हो।

- लव कुमार सिंह 

#ViratKohli, #RohitSharma, #IndianCricket, #Dhoni, #Sports, #TeamIndia, #T20WorldCup

How will the Indian team perform in the T20 World Cup?


Thursday, 25 February 2021

गेंद गुलाबी होते ही, ये बल्ला क्यूं शर्माता है?

भारत बनाम इंग्लैंड, तीसरा डे-नाइट टेस्ट, नरेंद्र मोदी स्टेडियम, अहमदाबाद, 25 फरवरी 2021



वो मारा-वो मारा, अपन ने अंग्रेजों को दे मारा

पर रुको-रुको, मजा कुछ कम हो जा रा

एक सवाल दिमाग में बार-बार आ रा

तो सुनो.....

.......

गेंद गुलाबी होते ही, ये बल्ला क्यूं शर्माता है?

गेंद गुलाबी होते ही, इसे जाड़ा क्यूं चढ़ जाता है?

‘जो’ भी सामने जाता है, अपनी ‘रूट’ उखाड़ दे आता है

कोई कितना विराट क्यों न हो, सूक्ष्म-सूक्ष्म हो जाता है

गेंद गुलाबी होते ही, ये बल्ला क्यूं शर्माता है?

.......

और पिच प्यारी के क्या कहने, इसे नाच नचाना आता है

खिलाड़ियों की औकात नहीं, गर पिच को टूटना आता है

मोदी मैदान की पिच बोले, किसी बड़े झाम की ना जरूरत

ऐसे विकेटों की पतझड़ में, मैच टेनिस मैदान पर हो जाता है।

गेंद गुलाबी होते ही, ये बल्ला क्यूं शर्माता है?

.......

लगता है डे-नाइट मैच में, समय चक्र बिगड़ जाता है

आराम का जब टाइम हो गया, तब खेलने क्या कोई जाता है?

शाम को जब फ्रेश होने की बारी, तब बैटिंग का नंबर आता है

जब बॉडी-माइंड ही फ्रेश नहीं, तो बल्ला मुरझा जाता है।

गेंद गुलाबी होते ही, ये बल्ला क्यूं शर्माता है?

..........

गेंद लाल ही रहने दो, इसमें आपका क्या घट जाता है?

कह दो, एक मैच में पिच होगी सफाचट, दूसरा घास को जाता है

टेस्ट के दिन चार करो, धीमी रन गति पर दंड लगा दो

इसके बाद टेस्ट में देखो, कितना मजा फिर आता है।

गेंद गुलाबी होते ही, ये बल्ला क्यूं शर्माता है?

-लव कुमार सिंह

Saturday, 8 February 2020

इंडियन होते हुए भी चाइनामैन क्यों कहलाते हैं कुलदीप यादव?

New Words, That ears heard and eyes read

कानों ने जो नया सुना, आंखों ने जो नया पढ़ा 

(अक्टूबर 2017) 




1930 में वेस्टइंडीज और इंग्लैंड के बीच टेस्ट मैच हो रहा था। वेस्टइंडीज के चीनी मूल के बाएं हाथ के स्पिनर एलेक्स ने इंग्लैंड के रोबिंस को बाएं हाथ से लेग स्पिन गेंद फेंककर बोल्ड कर दिया। रोबिंस को इस पर विश्वास नहीं हुआ कि बाएं हाथ का गेंदबाज भी लेग स्पिन करा सकता है। उस गेंद से हैरान, परेशान रोबिंस पैवेलियन की ओर रुख करते हुए एलेक्स को बुरा-भला कहने लगे।

रोबिंस ने एलेक्स को जो अपशब्द कहे, उनमें से एक का अर्थ भारतीय जबान में कुछ यूं था- "चीनी कहीं का..." बस उसी के बाद से बाएं हाथ के उन गेंदबाजों को "चाइनामैन" कहा जाने लगा जो लेग स्पिन भी करा सकते थे। 

भारतीय क्रिकेट टीम (#TeamIndia) के युवा गेंदबाज कुलदीप यादव (#KuldeepYadav) भी इसीलिए इंडियन (#Indian) होते हुए भी चाइनामैन कहलाते हैं। क्रिकेट के इतिहास में मात्र 4-5 गेंदबाज ही चाइनामैन (#Chinaman) गेंदबाज हुए हैं।


मेहरम यानी खून का रिश्तेदार


पिछले दिनों यह शब्द पहली बार उस समय कानों में पड़ा जब केंद्र सरकार ने हज (#Haz) पर जाने वाली महिलाओं के संबंध में नई व्यवस्था की घोषणा की। सरकार ने कहा कि 45 वर्ष की आयु से ऊपर की चार महिलाएं बिना मेहरम के भी हज पर जा सकती हैं। मेहरम यानी ऐसा व्यक्ति जो महिला का खून का रिश्तेदार हो। अर्थात 45 वर्ष से ऊपर की चार महिलाएं बिना खून के रिश्तेदार को साथ लिए भी हज पर जा सकती हैं। अभी तक हज पर जाने के लिए महिला के साथ उसके मेहरम (खून के रिश्तेदार) का होना जरूरी होता था।

प्रो बोनो लायरिंग यानी मुफ्त में मुकदमा लड़ना

किसी वकील द्वारा जनहित में किसी उद्देश्य की प्राप्ति के लिए बिना फीस के मुकदमा लड़ना "प्रो बोनो लायरिंग" (#ProBonoLawyering) कहलाता है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने यहां और उच्च न्यायालयों में वकीलों को वरिष्ठ वकील का दर्जा देने के लिए जो योग्यताएं तय की हैं, उनमें प्रो बोनो लायरिंग भी एक योग्यता है। इसके अतिरिक्त भविष्य में जज बनने के लिए भी वकीलों के लिए यह जरूरी योग्यता बन सकती है।

पाकिस्तान को अहमदिया मंजूर नहीं 

पाकिस्तान के संविधान में अहमदिया (#AhmadiyyaMuslim) समुदायों के लोगों को मुसलमान नहीं माना जाता है। इसका कारण यह है कि आम मुसलमान जहां यह विश्वास करते हैं कि मोहम्मद साहब खुदा के भेजे आखिरी पैगंबर (दूत) थे, वहीं अहमदिया लोग मिर्जा गुलाम अहमद को मोहम्मद साहब के बाद एक और पैगंबर मानते हैं। इसी कारण से 1979 में जब पाकिस्तान के भौतिकी विज्ञानी अब्दुस्सलाम को नोबेल पुरस्कार मिला तो वहां कोई खुशी जाहिर नहीं की गई, क्योंकि अब्दुस्लाम अहमदिया थे। पिछले दिनों पाकिस्तान (#Pakistan) के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने कायदे आजम यूनिवर्सिटी के फिजिक्स विभाग का नाम अब्दुस्सलाम के नाम पर रखने की दरियादिली दिखाई, लेकिन अब इस नाम को हटाने की तो मांग हो ही रही है, साथ ही नवाज शरीफ के दामाद ने तो सरकार में किसी भी पद पर बैठे अहमदिया व्यक्ति को निकाल बाहर करने की मांग कर दी है।

हार्वे वीनस्टीन- ऐश्वर्या राय पर भी थी बुरी नजर

हॉलीवुड के प्रसिद्ध फिल्म निर्माता हार्वे वीनस्टीन (#HarveyWeinstein) पर अनेक अभिनेत्रियों द्वारा यौन शोषण के आरोप लग रहे हैं। अभिनेत्रियां भी मामूली नहीं बल्कि एंजेलीना जोली और ग्वीनेथ पॉल्त्रोव जैसी नामी अभिनेत्रियां भी शामिल हैं। और तो और बताया जा रहा है कि ऐश्वर्या राय (#AswaryaRai) भी वीनस्टीन के चंगुल में आने से बाल-बाल बची थीं। ऐश्वर्या की हॉलीवुड की मैनेजर, जो की एक महिला हैं, ने खुलासा किया है कि ऐश्वर्या राय से मुलाकात के दौरान वीनस्टीन नेे पूरी कोशिश की कि ऐश्वर्या की मैनेजर उन दोनों को अकेला छोड़ दे लेकिन समझदार मैनेजर वहां से नहीं हटीं। अगर मैनेजर ऐश्वर्या को वीनस्टीन के पास अकेला छोड़कर चली जाती तो वीनस्टीन उसी प्रकार की कोई न कोई कोशिश जरूर करता जैसा कि वह हॉलीवुड अभिनेत्रियों के साथ कर चुका था। 

375 (2)

18 वर्ष से कम आयु (अवयस्क) लड़की के साथ संबंध बनाना भारतीय कानून के अनुसा दुष्कर्म माना जाता है, लेकिन इसी कानून की धारा #375(2) कहती है कि यदि 15 से 18 वर्ष की ऐसी अवयस्क लड़की किसी की पत्नी है तो यह दुष्कर्म नहीं होगा। लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट ने धारा 375 (2) में दिए गए इस अपवाद को गलत ठहराया है और कहा है कि चाहे पत्नी हो या कोई अन्य, हर स्थिति में 18 से कम उम्र की लड़की के साथ संबंध बनाना दुष्कर्म होगा।

पहली ग्रामीण यूनिवर्सिटी

जनसंघ के नेता और समाजसेवी नानाजी देशमुख की जयंती पर आए समाचारों से पता चला कि देश की पहली ग्रामीण यूनिवर्सिटी उन्होंने ही "चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय" के नाम से उत्तर प्रदेश के चित्रकूट में स्थापित की थी। 

अर्नेस्टो चे ग्वेरा

दिल्ली में कनाट प्लेस पर टी-शर्ट छांटते हुए कई टी-शर्टों पर इनकी तस्वीर दिख जाती है। बीते नौ अक्टूबर को लैटिन (दक्षिण) अमेरिका के इस क्रांतिकारी नेता की पुण्यतिथि थी। इनका जन्म 1928 में अर्जेंटीना में हुआ था  और ये पेशे से चिकित्सक थे, लेकिन 1955 में क्यूबा के फिदेल कास्त्रो से मुलाकात के बाद ये सशस्त्र क्रांति के रास्ते पर चल पड़े। 31 की उम्र में ये क्यूबा के राष्ट्रीय बैंक के अध्यक्ष और उसके बाद उद्योग मंत्री भी बने। 1964 में इन्होंने संयुक्त राष्ट्र में भाषण दिया। 1959 में ये मंत्री के रूप में भारत भी आए। लेकिन जल्द ही ये 37 की उम्र में पुराने जीवन में लौट गए और कांगो, बोलिविया आदि में क्रांति के लिए विद्रोहियों को प्रशिक्षित करने लगे। 9 अक्टूबर 1967 को 39 वर्ष की उम्र में बोलिविया में इनकी हत्या कर दी गई, जिसके जिम्मेदार अमेरिका और बोलिविया माने गए।

नैतिकता में गिरावट नई बात नहीं 

हम नैतिक मूल्यों में गिरावट की बात करते हैं, लेकिन यह मुद्दा नया नहीं हैं। आज एक जगह पढ़ रहा था कि 1941 में एक फिल्म आई थी "नया संसार" और उस फिल्म की मुख्य थीम ही "नैतिक मूल्यों में गिरावट" थी।

देश में शादीशुदा नाबालिग लड़कियां

2011 की जनगणना के अनुसार देश में 2 करोड़ 30 लाख नाबालिग लड़कियां शादीशुदा हैं। हिंदुओं में ऐसी लड़कियों का प्रतिशत 31, मुस्लिमों में 30.6, ईसाइयों में 12 और सिखों में 10.94 प्रतिशत है।

कुछ अन्य


यूनेस्को- संयुक्त राष्ट्र के 1946 में स्थापित संगठन यूनेस्को (मुख्यालय-पेरिस) से अमेरिका और इजराइल ने अलग होने की घोषणा की है। यूनेस्को यानी यूनाइटेड नेशंस एजूकेशनल, साइंटिफिक एंड कल्चरल आर्गनाइजेशन।

टाटा टेलीसर्विसेज- मोबाइल सेवा प्रदाता कंपनी टाटा अब एयरटेल के हाथों में जा रही है।

गौतम बंबावले- अभी तक पाकिस्तान में भारत के राजदूत बंबावले को चीन में भारत का नया राजदूत बनाया गया है।

कॉम्पैक्ट केन एरिया नीति- यह उत्तर प्रदेश की योगी सरकार की नीति है, जिसके तहत 15 किलोमीटर के क्षेत्र में एक मिल गन्ना खरीद के लिए अधिकृत होगी। रालोद इस नीति का विरोध कर रहा है।

कैटेलोनिया- स्पेन का एक राज्य जो अलग देश की मांग के कारण चर्चा में है। यहां इसके लिए जनमत संग्रह भी हो चुका है। यह एक समृद्ध प्रांत है और बार्सीलोना (वही बार्सीलोना ओलंपिक वाला) यहां का प्रसिद्ध शहर है।

कुलदीप नैय्यर- जनरैल सिंह भिंडरावाले की तुलना गुरु राम रहीम से करने पर शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने वरिष्ठ पत्रकार कुलदीप नैय्यर को पूर्व में दिया गया सम्मान वापस ले लिया।
- लव कुमार सिंह