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Wednesday, 19 May 2021

सुमित्रानंदन पंत : प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए 10 प्रमुख तथ्य

सुमित्रानंदन पंत के बारे में 10 प्रमुख तथ्य जो प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए बहुत काम के हैं



  1. हिंदी साहित्य में छायावादी युग के चार प्रमुख स्तंभों में से एक कहलाए। तीन अन्य स्तंभ थे जयशंकर प्रसाद, महादेवी वर्मा और सूर्यकांत त्रिपाठी निराला।
  2. जन्म वर्तमान उत्तराखंड के बागेश्वर जिले के कौसानी में 20 मई 1900 को हुआ। बचपन में नाम गोसाईं दत्त मिला जो उन्होंने अल्मोड़ा में हाईस्कूल की शिक्षा के दौरान बदलकर सुमित्रानंदन पंत कर लिया।
  3. चौथी कक्षा में ही कविता लिखना शुरू कर दिया था। काशी के क्वींस कॉलेज, इलाहाबाद के म्योर कॉलेज में पढ़ने के बाद असहयोग आंदोलन के दौरान कॉलेज छोड़कर घर पर ही पढ़ाई की। अनेक वर्ष कालाकांकर, प्रतापगढ़ में भी रहे।
  4. 1938 में मासिक पत्रिका ‘रूपाभ’ का संपादन किया। 1950 से 1957 तक आकाशवाणी से जुड़े रहे।
  5. 1958 में प्रकाशित काव्य संकलन ‘चिदंबरा’ के लिए 1968 में ज्ञानपीठ पुरस्कार मिला।
  6. 1960 में काव्य संग्रह ‘कला और बूढ़ा चांद’ के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार प्राप्त हुआ।
  7. 1961 में पद्मभूषण सम्मान मिला। उन्हें सोवियत लैंड नेहरू पुरस्कार भी मिला।
  8. 1964 में विशाल महाकाव्य ‘लोकायतन’ प्रकाशित हुआ। ‘पल्लव’ उनका सबसे कलात्मक कविता संग्रह माना जाता है। वीणा, उच्छवास, युगांत, स्वर्णकिरण, स्वर्णधूलि, ग्राम्या, गुंजन, सत्यकाम उनके अन्य प्रसिद्ध काव्य संग्रह हैं।
  9. हरिवंश राय बच्चन के साथ संयुक्त रूप से उन्होंने ‘खादी के फूल’ नाम का कविता संग्रह प्रकाशित कराया।
  10. वे मार्क्सवादी विचारधारा के थे। लेकिन वे महात्मा गांधी और योगी अरविंद से भी प्रभावित थे। उनका पूरा साहित्य ‘सत्यं शिवं सुंदरम्’ के आदर्श से प्रभावित रहा। लेकिन फिर भी इसमें बदलाव देखने को मिलता है। उनकी प्रारंभिक कविताओं में प्रकृति और सौंदर्य के दर्शन होते हैं। दूसरे चरण में छायावाद की सूक्ष्म कल्पनाएं और कोमल भावनाएं मिलती हैं तो अंतिम चरण में प्रगतिवाद और विचारशीलता देखने को मिलती है। जीवनभर अविवाहित रहे। 28 दिसंबर 1977 को मृत्यु हुई।
- लव कुमार सिंह

विष्णु शास्त्री चिपलूणकर : मात्र 32 वर्ष की उम्र में मराठी भाषा के 'शिवाजी' कहलाए

विष्णु शास्त्री चिपलूणकर के बारे में 10 प्रमुख तथ्य जो प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए बहुत काम के हैं



  1. विष्णु शास्त्री चिपपूणकर मराठी गद्य के युग प्रवर्तक साहित्यकार और संपादक कहलाते हैं।
  2. चिपलूणकर को मराठी भाषा का ‘शिवाजी’ कहा जाता है।
  3. जनवरी 1981 में जीजी अगरकर और बाल गंगाधर तिलक के साथ मिलकर मराठी में ‘केसरी’ और अंग्रेजी में ‘मराठा’ नाम के समाचार पत्र प्रकाशित करना प्रारंभ किया। ये वे समाचार पत्र थे जिनकी वजह से तिलक न केवल महाराष्ट्र बल्कि पूरे भारत में प्रसिद्ध हो गए। इन समाचार पत्रों के जरिये ही तिलक अपने जनजागरण अभियान को सफल बना सके।
  4. इससे पहले उन्होंने ‘निबंधमाला’ नाम की मासिक पत्रिका निकाली। अनेक लेख, निबंध लिखे जिनमें ‘आमच्या देशाचीं सद्यस्थिति’ (हमारे देश की वर्तमान स्थिति) बहुत चर्चित हुआ और इससे अंग्रेज भी उनसे नाराज हो गए।
  5. उन्होंने सेमुअल जॉनसन के उपन्यास ‘रासेलस’ का मराठी में अनुवाद भी किया। उन्होंने 1872 से 1879 तक सरकारी स्कूल में अध्यापक के रूप में काम किया। उन्होंने एक मासिक ‘काव्येतिहास संग्रह’ भी निकाला।
  6. उन्होंने बाणभट्ट की ‘कादंबरी’ के अलावा ‘अरेबियन नाइट्स’ का भी मराठी में अनुवाद किया।
  7. ‘चित्रशाला’ नामक प्रेस की स्थापना की जो भारत में रंगीन चित्रों को प्रकाशित करने वाले सबसे पहले छापेखानों में से एक थी। उन्होंने ‘किताबखाना’ नाम से पुस्तकों की एक दुकान भी खोली।
  8. युवाओं में स्वदेशप्रेम जागृत करने के उद्देश्य से चिपलूणकर ने ‘न्यू इंग्लिश स्कूल’ नाम की पाठशाला की भी स्थापना की।
  9. ये सब काम चिपलूणकर जी ने मात्र 32 वर्ष के जीवन में ही कर डाले थे।
  10. उनका जन्म पुणे में 20 मई 1850 को हुआ था जबकि निधन 17 मार्च 1882 को हो गया। उनके निधन का कारण टायफाइड की बीमारी बनी।
- लव कुमार सिंह