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Sunday, 7 June 2020

जानलेवा है जीरो साइज

Health - Zero size is fatal

  • शरीर को नुकसान देने के अलावा यह कुछ नहीं करता
  • It does nothing except harm the body




2007 में फिल्म “टशन“ के लिए करीना कपूर ने आठ किलो वजन कम किया तो देश में जीरो साइज का शोर मच गया। वास्तव में यह बाजार में उस फिल्म और बाद में कुछ उत्पादों को बेचने का गिमिक था। इसी फिल्म के बाद करीना ने एक लैपटॉप का प्रचार किया जिसमें लैपटाप की बनावट की तुलना करीना के जीरो साइज फिगर से की गई थी।

ये जीरो साइज है क्या बला? दरअसल जीरो साइज महिलाओं के वस्त्रों का एक माप है जो दुनियाभर में केवल अमेरिका में चलता है। यह ग्रेट ब्रिटेन के बाजार के साइज चार और यूरोप के बाजार के साइज 32-34 इंच के बराबर है। जिस महिला का सीना 32 इंच, कमर 24 इंच और कूल्हे 34 इंच के हों तो वह जीरो साइज फिगर कहा जाता है। इसे इसलिए भी जीरो साइज कहा जाता है क्योंकि स्टोरों में महिलाओं के लिए उपलब्ध कपड़ों की शुरुआत 24 इंच की कमर वाले वस्त्रों से होती है।

यहां बताते चलें कि विदेशों में डबल जीरो (00) साइज का शब्द भी चलन में है, लेकिन डबल जीरो साइज की महिला घर या सड़क पर नहीं अस्पताल में ही मिल सकती है। इसी तरह जीरो साइज को भी कहा जाता है कि इस फिगर का मतलब अस्पताल जाने के समान ही है क्योंकि जीरो साइज वाली युवती या महिला को कई बीमारियां घेर सकती हैं। किसी ने फेसबुक पर टिप्पणी भी की है कि जीरो साइज शब्द तो सोमालिया, इथोपिया जैसे देशों के लिए ज्यादा उपयुक्त है, जहां लोगों को भरपेट भोजन नहीं मिल पाता। किसी और ने कहा कि यह शब्द आम युवतियों के लिए नहीं, बल्कि रैंप पर कंकाल की तरह दिखने वाली मॉडलों के लिए ही ठीक है।

विशेषज्ञ कहते हैं कि जीरो साइज की दीवानी युवतियों, महिलाओं को बुढ़ापे में भारी दिक्कत पेश आती है। उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता घट जाती है जिससे आयु बढ़ने पर उन्हें बीमारियां तेजी से घेरती हैं। कुछ वर्ष पहले विदेश में 4000 लड़कियों पर किया गया शोध कहता है कि जीरो साइज वाली युवतियों में उम्र बढ़ने पर हड्डियों की बीमारी ऑस्टियोपोरोसिस की पूरी-पूरी आशंका रहती है। दरअसल वसा यानी फैट हमारी हड्डियों के निर्माण में अहम भूमिका निभाती है, इसलिए इसके अभाव में हड्डियों को नुकसान पहुंचना लाजिमी है।

विदेश में हुआ एक और शोध कहता है कि महिलाओं में ऑस्टियोपोरोसिस और कूल्हे के फ्रैक्चर की आशंका पुरुषों की तुलना में तीन गुना ज्यादा होती है, लिहाजा महिलाओं की हड्डी की रक्षा के लिए तो वसा और भी जरूरी हो जाती है। जीरो साइज जैसा शरीर अपनाने में बुलिमिया (कुछ खा लेने पर निराशा का भाव आना),, एनोरेक्सिया (भूख न लगने की बीमारी) और डायसिम्मपोडिक डिसआर्डर जैसी बीमारियां भी हो जाती हैं।



हम रैंप पर कैटवॉक करती मॉडलों में जीरो साइज फिगर की झलक देख सकते हैं। इनके चेहरे भी बीमार से ही नजर आते हैं। यहां बताते चलें कि 2006 में ब्राजील की मॉडल अन्ना कैरोलिना रेस्टोर्ना की एनोरक्सिया की बीमारी से मौत हो गई थी। 21 साल की अन्ना उस दौरान केवल सेब और टमाटर का ही सेवन कर रही थी। उसी साल उरुग्वे की मॉडल लुसेल रामोश की उरुग्वे फैशन वीक के दौरान मौत हो गई थी। तब रामोस केवल 22 साल की थी। छह महीने बाद ही रामोस की 18 वर्षीय बहन और मॉडल एलिना अपने शयन कक्ष में मृत मिली थी। डॉक्टरों के अनुसार उसकी मौत का कारण कुपोषण था। इस तरह 2006 हैरान करने वाला साल रहा। कुपोषण से एक तरफ जहां सोमालिया जैसे देशों में बच्चे मर रहे थे, वहीं भारी भरकम बैंक बैलेंस वाली मॉडल भी कुपोषण से ही मर रही थीं। हालांकि इन हादसों के बाद मॉडल तो सतर्क हो गईं पर सोमालिया में हो रही मौतें जारी रहीं।

एक समय मशहूर मॉडल कैट मास की तुलना पेड़ की टहनी से की गई थी। कैट को भी एनोरक्सिया की बीमारी निकली। इसी तरह विदेशी अभिनेत्री निकोल रिची एक बार सेट पर ही गिर पड़ी थी। इसकी वजह भी डॉक्टरों ने कुपोषण ही बताया था।

यानी कुल मिलाकर जीरो साइज एक बीमारी ही है। इसे अपनाने की कोशिश करने वाली आम युवतियों को जान लेना चाहिए कि करीना कपूर या अन्य अभिनेत्रियां जब ऐसी कोशिश करती हैं तो उनके लिए विशेषज्ञ उनके साथ मौजूद रहते हैं। ये विशेषज्ञ उनकी एक-एक चम्मच खुराक का ध्यान रखते हैं, जिससे उन्हें परेशानी न हो। इसके बावजूद प्रियंका चोपड़ा समेत कई अभिनेत्रियों के फिल्म के सेट पर कमजोरी के कारण परेशानी खड़ी होने की खबरें आती रहती हैं। जीरो साइज की दीवानी फिल्म अभिनेत्री उदिता गोस्वामी के बारे में तो यह तक खबर आई थी कि उन्होंने एक रक्तदान शिविर में रक्तदान करने की इच्छा जाहिर की मगर वह रक्तदान के योग्य नहीं पाई गईं। उनके खून में हीमोग्लोबिन की कमी थी।

इसीलिए जीरो साइज आम युवती के लिए नहीं है। जानलेवा है जीरो साइज। ...और अब तो समय के साथ करीना कपूर ने भी जीरो साइज से तौबा कर ली है। शादी के बाद उनकी सुडौल काया को देखिए और भूल जाइए जीरो साइज को। सुडौल काया से ध्यान आया कि जीरो साइज या स्लिम ट्रिम के बजाय अपना हिंदी का “सुडौल“ शब्द बड़ा ही खूबसूरत है। “सुडौल“ शब्द सुनते या पढ़ते ही सुंदरता और सुगढ़ता का अहसास हो जाता है। लिहाजा आप भी जीरो-वीरो छोड़ें और सुडौल हो जाएं।

- लव कुमार सिंह

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